Friday, February 13, 2026
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इंदौर में धोखाधड़ी पीड़ित जिस व्यक्ति को 50 लाख दिलवाए, वही असली हकदार के प्लाट से नहीं छोड़ रहा कब्जा

 पहले से बिके हुए प्लाट की फर्जी रजिस्ट्री बनाकर दलालों ने इसे दूसरे को बेच दिया। दूसरे व्यक्ति ने इस पर कुछ निर्माण भी कर लिया। जब प्लाट के पहले और असली खरीदार को पता चला तो आपत्ति ली। दलालों द्वारा की गई धोखाधड़ी सामने आई तो दूसरे व्यक्ति ने पुलिस, प्रशासन और सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की। प्रशासन ने फर्जीवाड़ा करने वाले दलाल से प्लाट और निर्माण खर्च के 50 लाख रुपये वापस दिलवाए। अब वह असली हकदार को उसका प्लाट नहीं लौटा रहा है। प्लाट के असली हकदार ने प्रशासन को शिकायत की है।

पिछले वर्ष अक्टूबर में प्रशासन ने डायरी पर प्लाट बेचकर धोखाधड़ी करने वाले दलालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। उस समय डा. जय वर्मा ने भी प्रशासन को शिकायत की थी, जिसके मुताबिक उनके पिता विजय वर्मा और चाचा अजय वर्मा को एरोड्रम क्षेत्र की राजश्री कालोनी में दलाल प्रवीण अजमेरा ने 37 नंबर का प्लाट बेचा था। वास्तव में यह प्लाट पहले से पंकज पाटोदी ने खरीद रखा था। उनके पास इसकी रजिस्ट्री भी थी, लेकिन अजमेरा और उसके साथी अशोक कुचेरिया ने इस प्लाट के फर्जी दस्तावेज बनाकर वर्मा परिवार को बेच दिया। वर्मा ने इस पर तीन दुकानें भी बना ली। कोरोना की दूसरी लहर में पाटोदी कई दिन तक राजश्री कालोनी के अपने प्लाट को देखने नहीं जा पाए। हालात सामान्य होने पर वे प्लाट देखने पहुंचे तो वर्मा का निर्माण मिला। उन्होंने डा. वर्मा और उनके पिता को वास्तविक रजिस्ट्री दिखाई तो दलाल अजमेरा की करतूत सामने आई। इसके बाद डा. वर्मा ने प्रशासन को अजमेरा की शिकायत की। उसके खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर पुलिस ने गिरफ्तार किया। बाद में कलेक्टर मनीष सिंह और अपर कलेक्टर अभय बेड़ेकर के हस्तक्षेप पर दलाल अजमेरा से डा. वर्मा को प्लाट और निर्माण के 50 लाख रुपये दिलाए गए। अब असली मालिक पाटोदी तीन महीने से प्रयास कर रहे हैं, लेकिन डा. वर्मा कब्जा नहीं छोड़ रहे हैं।

शिकायत के बाद बदले सुर – पाटोदी के मुताबिक मैं एसडीएम पराग जैन से भी मिला था, लेकिन उन्होंने मुझे डा. वर्मा से बात करने के लिए बोला। डा. वर्मा पहले मुझसे निर्माण के 10 लाख रुपये मांग रहे थे और अब दो लाख रुपये पर आ गए हैं। मैं तो प्लाट का वास्तविक खरीदार हूं। मैंने सभी दस्तावेज जांचकर अशोक डागा से यह प्लाट खरीदा था। पाटोदी की बहन कीर्ति अग्रवाल ने मंगलवार को अपर कलेक्टर बेड़ेकर को डा. वर्मा की शिकायत की है। प्रशासन के पास मामला पहुंचने के बाद डा. वर्मा के सुर बदल गए हैं। उन्होंने बताया कि हम तो कब्जा छोड़ने को तैयार हैं। प्लाट पर मेरे पिताजी ने निर्माण कराया था। उनका निधन हो चुका है। प्लाटधारक चाहें तो निर्माण हटा सकते हैं। मैं अपर कलेक्टर से मिलने गया था, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। बुधवार को फिर मिलने जाऊंगा।

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