कोरोना के घटते संक्रमण के बाद राज्य शासन ने कक्षा पहली से बारहवीं तक के स्कूल 50 प्रतिशत क्षमता के साथ खोलने के आदेश किए हैं, पर अचानक हुए आदेश के कारण निजी स्कूल तैयार नहीं हैं। स्कूल खुलने में तीन-चार दिन लग सकते हैं। दूसरी तरफ सर्दी-खांसी के संक्रमण को देखते हुए अभिभावक पहली से आठवीं कक्षा तक के छोटे बच्चों को फिलहाल स्कूल भेजने को तैयार नहीं हैं। वे चाहते हैं कि छोटे बच्चाें को कोरोना का टीका लगने तक सावधानी बरती जानी चाहिए।
इस बीच शासकीय स्कूल तो एक फरवरी से खुल जाएंगे लेकिन यहां भी बच्चों के पूरी तरह आने में कुछ दिन लगेंगे। जिला शिक्षा अधिकारी मंगलेश व्यास का कहना है कि बच्चे भले ही स्कूल नहीं आ रहे हैं, लेकिन शासकीय स्कूलों में स्टाफ तो आ रहा है। हमारी तैयारी तो पूरी है लेकिन एक फरवरी से स्कूल खुलने के बाद भी पहले दिन से सभी बच्चों का आना मुश्किल है। आमतौर पर विद्यार्थी अपने साथियों से बात करके पूरी तरह स्कूल खुलने पर ही आना शुरू करेंगे।
निजी सीबीएसइ स्कूलों के संगठन सहाेदय के अध्यक्ष यूके झा और सचिव कंचन तारे ने बताया कि सोमवार को हमारे समूह की बैठक हुई थी। इसमें तय हुआ था कि 14 फरवरी से स्कूल खोले जाएंगे, लेकिन तब तक एक फरवरी से स्कूल खोलने का शासन का आदेश नहीं आया था। अब मंगलवार को सभी स्कूलों से एक बार फिर बात करेंगे। एक फरवरी से स्कूल खोलना तो संभव नहीं होगा, लेकिन तैयारी करके अगले तीन-चार दिन और सप्ताहभर में एक-एक करके सारे स्कूल खुलते जाएंगे। कई स्कूलों में 14 फरवरी से नौवीं और ग्यारहवीं की वार्षिक परीक्षा आफलाइन होने जा रही है।
उधर एमपी बोर्ड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की ओर से सोमवार को मुख्यमंत्री के नाम प्रशासन को ज्ञापन भी दिया गया। इसमें कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए कक्षा एक से बारह तक के स्कूल अतिशीघ्र खोलने की मांग की गई। साथ ही आरटीई की बकाया राशि का भुगतान करने, मान्यता नवीनीकरण सहित अन्य समस्याओं को हल करने का अनुरोध किया गया। इस दौरान एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण खरात, आरबी प्रजापति, विनोद शर्मा, मनोज मिश्रा आदि मौजूद थे।




