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ED कोर्ट ने सौरभ के परिजन की अर्जी खारिज की

प्रवर्तन निदेशालय (ED) कोर्ट ने परिवाहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा, चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल के परिजनों की अर्जी को खारिज कर दिया है। तीनों के परिजन ने ईडी की रिमांड के दौरान मुलाकात की अनुमति कोर्ट से मांगी थी। बुधवार की शाम को कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया है। ऑर्डर शीट के मुताबिक, केवल आरोपियों के वकील ही उनसे रिमांड के दौरान अवश्यक होने पर मुलाकात कर सकेंगे। परिवार के किसी भी सदस्य को मुलाकात की अनुमति नहीं रहेगी।

बता दें कि, आरटीओ के पूर्व करोड़पति कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा, उसके सहयोगी चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल को कोर्ट ने मंगलवार को ईडी को 17 फरवरी तक रिमांड पर सौंप दिया था।

ईडी तीनों से मेंडोरी के जंगल से कार में मिले 52 किलो सोना, 11 करोड़ रुपए कैश समेत अन्य करोड़ों रुपए की संपत्ति के मामले में पूछताछ कर रही है। ईडी ने सोमवार को अठारहवें अपर जिला न्यायाधीश सचिन कुमार घोष की कोर्ट में याचिका लगाकर 7 दिन का रिमांड मांगा था। कोर्ट ने केंद्रीय जेल अधीक्षक को तीनों आरोपियों को पेश करने का आदेश दिया था। जिसके बाद तीनों को मंगलवार की दोपहर 1 बजे कोर्ट में पेश किया गया।

हथकड़ी में पेश करने पर कोर्ट की नाराजगी

मंगलवार को सौरभ, चेतन और शरद को कोर्ट में पेश करते समय जेल पुलिस ने तीनों को हथकड़ी लगा रखी थी। सौरभ के वकील राकेश पाराशर ने इस पर आपत्ति ली तो कोर्ट ने जेल गार्ड को फटकार लगाई। कोर्ट में ही तीनों की हथकड़ी खोली गई और लंच के बाद उन्हें अदालत के लॉकअप में रखा गया।

जब ईडी को सुपुर्द किया गया तो तीनों को अलग-अलग लाकर ईडी की इनोवा कार में बीच वाली सीट पर बैठाया गया। ईडी ने तीनों का मेडिकल परीक्षण जेपी अस्पताल में कराया।

अनसुलझे सवालों के जवाब ढूंढेंगी ईडी

दरअसल, 4 फरवरी को सौरभ शर्मा, शरद जायसवाल और चेतन सिंह गौर को लोकायुक्त पुलिस संबंधी मामलों की कोर्ट में पेश किया गया था। यहां कोर्ट ने तीनों को 17 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए थे। न्यायिक हिरासत में ईडी ने 5, 6 और 7 फरवरी तक लगातार सौरभ, चेतन और शरद से जेल पुलिस के सामने अलग-अलग और आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की थी।

अभी कई सवाल अनसुलझे हैं। ईडी को उनके जवाब नहीं मिल पाए हैं, इसलिए उसने कोर्ट में दोबारा आरोपियों को पूछताछ के लिए रिमांड पर देने का आवेदन लगाया था।

ईडी ने एफआईआर में ये बातें बताईं

  • सौरभ शर्मा को 2015 में मध्य प्रदेश राज्य परिवहन विभाग में अनुकंपा के आधार पर कॉन्स्टेबल बनाया गया था। नियुक्ति के बाद उसने आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की।
  • चेतन सिंह गौड़ और शरद जायसवाल के साथ मिलीभगत करके उसने कई फर्मों/कंपनियों की स्थापना की। सौरभ ने दोनों और अपने परिवार के सदस्यों के बैंक खातों का उपयोग करके अपराध की आय को संपत्तियों में निवेश करने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग की।
  • ईडी ने जांच में 27.12.2024 और 17.01.2025 को सौरभ शर्मा, उनके परिवार के सदस्यों, शरद जायसवाल और चेतन सिंह गौड़ के आवासीय परिसरों में तलाशी ली।
  • तलाशी में संपत्तियों, अलग-अलग कंपनियों/फर्मों में किए गए निवेश और अन्य संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए।
  • चेतन सिंह गौड़ के वाहन से 52 किलोग्राम सोने के बिस्किट और 11 करोड़ रुपए कैश जब्ती की गई है।
  • अब तक की जांच में सौरभ शर्मा और उनके परिवार/मित्रों/फर्मों के नाम पर लगभग 25 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों में निवेश की बात सामने आई। 10 करोड़ रुपए की चल संपत्तियां जब्त/फ्रीज की गईं।

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