भोपाल सेंट्रल के विचाराधीन बंदी प्रकाश चंद्र की शुक्रवार तड़के संदिग्ध हालात में मौत हो गई। उसे हमीदिया अस्पताल में पेट की तकलीफ के बाद भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि जेल में डॉक्टर उसे प्रताड़ित करते थे। उनके साथ बीमारी के दौरान मारपीट की गई। मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है। केस की न्यायिक जांच शुरू कर दी गई है।
प्रकाश चंद्र जैन (42) बाड़ी जिला रायसेन में रहते थे। भाई सुरेंद्र जैन ने बताया कि प्रकाश पत्रकार थे। सुरेंद्र का आरोप है कि बाड़ी पुलिस ने अड़ीबाजी के झूठे केस में उन्हें जेल भेजा। स्वास्थ्य कारणों के चलते उन्हें रायसेन जेल से भोपाल सेंट्रल जेल ट्रांसफर किया गया। 14 फरवरी से भोपाल जेल में बंद थे। उनके लिवर में तकलीफ थी, जेल के अस्पताल में चेकअप के लिए पहुंचे तो डॉक्टर ने उन्हें अपशब्द कहे। यहां तक की उनकी बीमारी को झूठा बोला और मारा-पीटा भी गया। यह तमाम बातें भाई ने उन्हें जेल में मिलने के दौरान बताई थी।
निगरानी बदमाश की शिकायत पर केस दर्ज किया था
सुरेंद्र के मुताबिक जिस रितिक जैन की शिकायत पर प्रकाश को अड़ीबाजी का आरोपी बनाया गया वह स्वयं थाने का लिस्टेड बदमाश है। क्योंकि भाई पत्रकारिता के माध्यम से समय-समय पर स्थानीय पुलिस के भ्रष्टाचार को उजागर करता था, इस कारण उसे फंसाया गया और जेल भेजा।
जेल प्रशासन की शिकायत सीएम हैल्प लाइन पर भी की
मृतक की पत्नी चांदनी जैन का आरोप है कि जेल प्रशासन द्वारा पति को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। जेल में हर बार मुलाकात होने पर वह यह शिकायत करते थे। जेल में उनके साथ दुर व्योहार करने को लेकर हमने सीएम हैल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी।




