शशिकांत तिवारी, भोपाल। शहरों में मरीजों के इलाज की सुविधाएं बढ़ने जा रही हैं। एक साल के भीतर प्रदेश में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (यूपीएचसी) और संजीवनी क्लीनिक मिलाकर 257 अस्पताल खुलेंगे। 15 वें वित्त आयोग के तहत 467 करोड़ रुपये प्रदेश को शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिए मिले हैं। इससे यह अस्पताल खोलने के साथ ही मौजूदा अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाने का प्रविधान भी है। इन अस्पतालों के खुलने का फायदा यह होगा कि मरीजों को उनके घर के पास ही इलाज मिल जाएगा।
इतना ही नहीं पहले से चल रहे अस्पतालों में जांच और इलाज की सुविधाएं भी बढ़ाई जाएंगी। अभी प्रदेश के शहरों में 110 संजीवनी क्लीनिक, 141 यूपीएचसी और 62 सिविल डिस्पेंसरी हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अधिकारियों ने बताया कि नए पुराने सभी संजीवनी क्लीनिक और यूपीएचसी का एक साल का बजट 75 लाख रुपये है। इसमें 25 लाख रुपये भवनों के उन्नयन के लिए है। बाकी राशि दवाएं और अन्य सामान के लिए है। हर साल 12 लाख रुपये का प्रविधान किराए के लिए रखा गया है। अब 46 तरह की जांचें हो सकेंगी दोनों तरह के अस्पतालों में जांचों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है।
अभी कार्ड से 12 तरह की जांचें की जा रही हैं। अब इन जांचों के अलावा 34 तरह के जांच लैब से कराई जाएंगी। इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से एक निजी लैब (फर्म) से प्रदेश भर में जांचों के लिए अनुबंध किया गया है। लैब की तरफ से अस्पतालों से सैंपल लेकर एक जगह (हब) एकत्र किया जाएगा। वहीं पर जांच कराई जाएगी। भोपाल संभाग में यह सुविधा शुरू कर दी गई है।यहां कोलार, गांधी नगर, बैरसिया और अशोका गार्डन यूपीएचसी को हब बनाया गया है। उज्जैन संभाग में हफ्ते भर के भीतर और मार्च अंत तक पूरे प्रदेश में इतनी जांचें होने लगेंगी।
हर महीने आ रहे औसतन 1500 मरीज
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों ने बताया कि हर महीने औसतन 1500 मरीज संजीवनी क्लीनिक या यूपीएचसी में आ रहे हैं। यानी हर दिन करीब 50 मरीज आ रहे हैं।संजीवनी क्लीनिक खुलने का समय सुबह 10 से शाम पांच बजे तक और यूपीएचसी का समय सुबह नौ से शाम पांच बजे तक है।
यूपीएचसी और संजीवनी क्लीनिक में मिलती हैं ये सुविधाएं




