Saturday, October 24, 2026
23.8 C
Bhopal

पत्रकार हूँ, किसी के बाप की जागीर नहीं…

पत्रकार ममता गनवानी की कलम से ✍🏻

“यह खबर मत चलाइए…”
“यह हेडलाइन बदल दीजिए…”
“थोड़ा हल्का लिखिए… ऊपर से फोन आया है…”

अगर आप पत्रकार हैं, तो ये वाक्य आपके लिए नए नहीं हैं। आज का पत्रकार सिर्फ खबर नहीं लिखता, वह हर दिन दबावों की भूलभुलैया से गुजरता है। समाज का एक वर्ग चाहता है कि उसकी छवि चमकती रहे, पूंजीपति चाहते हैं कि उनके विज्ञापन के बदले उनकी आलोचना दबी रहे, और सरकार व प्रशासन चाहते हैं कि खबर वही बने जो ‘सुविधाजनक’ हो। ऐसे में पत्रकार से उम्मीद की जाती है कि वह कलम नहीं, रिमोट कंट्रोल से चले।

विडंबना देखिए — जब पत्रकार सच्चाई लिखता है तो उसे “एजेंडा” कह दिया जाता है, और जब वह चुप रहता है तो उसे “समझदार” माना जाता है। पूंजी का खेल ऐसा है कि विज्ञापन बंद करने की धमकी एक अदृश्य सेंसर बन चुकी है। “इतना भी मत लिखिए कि संबंध खराब हो जाएं” — यह संवाद आजकल संपादकीय मीटिंग का स्थायी वाक्य बन चुका है। जैसे खबर कोई सार्वजनिक दायित्व नहीं, बल्कि निजी रिश्तों का हिसाब-किताब हो।

सरकार और प्रशासन भी कम नहीं। सूचना का अधिकार हो या प्रेस कॉन्फ्रेंस — सवाल पूछना अब साहस का काम हो गया है। “नाम नोट कर लिया है…” जैसे वाक्य लोकतंत्र की नई शब्दावली बन चुके हैं। जिनसे जवाब मांगा जाना चाहिए, वही पत्रकार से जवाब मांगने लगते हैं — “आपने यह खबर क्यों चलाई?” मानो पत्रकारिता कोई अपराध हो, और सत्ता उसकी अदालत।

समाज का भी एक वर्ग अजीब अपेक्षाएं रखता है। जब खबर उनके पक्ष में हो तो पत्रकार ‘निडर’ कहलाता है, और जब खबर उनकी आलोचना करे तो वही पत्रकार ‘बिका हुआ’ घोषित कर दिया जाता है। सच्चाई अब लोगों की सुविधा के अनुसार स्वीकार की जाती है। सच वही अच्छा है जो हमारे पक्ष में हो; बाकी सब साजिश।

लेकिन सवाल यह है — क्या पत्रकार किसी के बाप की जागीर है?
क्या कलम किसी विज्ञापन का बंधक है?
क्या खबर किसी मंत्रालय की प्रेस-नोट का विस्तार है?

पत्रकारिता का काम सत्ता के साथ खड़े होना नहीं, सत्ता से सवाल करना है। उसका दायित्व समाज को आईना दिखाना है, चाहे आईना देखने वाले को अपना चेहरा पसंद आए या नहीं। अगर पत्रकार तयशुदा स्क्रिप्ट पढ़ने लगे, तो लोकतंत्र का मंच खाली हो जाएगा और तालियां बजाने वाले ही वक्ता बन जाएंगे।

यह लेख किसी विद्रोह का घोषणापत्र नहीं, बल्कि एक याद दिलाना है — पत्रकारिता पेशा नहीं, जिम्मेदारी है। और जिम्मेदारी किसी की जागीर नहीं होती।
पत्रकार हूँ — सच लिखना मेरा अधिकार ही नहीं, मेरा धर्म है।

Hot this week

भोपाल के 55 इलाकों में रविवार को बिजली कटौती

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को मेंटेनेंस...

छोला इलाके में थिंक गैस की लाइन में लगी आग, जेसीबी से खुदाई के दौरान हुआ लीकेज

भोपाल: राजधानी के छोला इलाके में शनिवार दोपहर थिंक गैस...

नेशनल हेराल्ड जमीन मामला: बीडीए का केस कोर्ट ने खारिज किया

भोपाल: भोपाल के एमपी नगर स्थित नेशनल हेराल्ड की जमीन...

पान मसाला सिंडिकेट पर कार्रवाई में अलमारी से निकली 32 बोर की पिस्टल

ग्वालियर: फर्जी और अवैध पान मसाले की पैकिंग के सिंडिकेट...

Topics

भोपाल के 55 इलाकों में रविवार को बिजली कटौती

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को मेंटेनेंस...

नेशनल हेराल्ड जमीन मामला: बीडीए का केस कोर्ट ने खारिज किया

भोपाल: भोपाल के एमपी नगर स्थित नेशनल हेराल्ड की जमीन...

पान मसाला सिंडिकेट पर कार्रवाई में अलमारी से निकली 32 बोर की पिस्टल

ग्वालियर: फर्जी और अवैध पान मसाले की पैकिंग के सिंडिकेट...

बंदूक रखते समय चली गोली से आबकारी अधिकारी की पत्नी की मौत

सतना: सतना की मंदाकिनी विहार कॉलोनी में सहायक आबकारी अधिकारी...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img