आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा और उसके सहयोगियों शरद जायसवाल और चेतन सिंह गौर को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेजने से पहले जज सचिन कुमार घोष ने कोर्ट में वकीलों के संवाद के तरीके पर नाराजगी जताई। न्यायाधीश घोष ने आरोपियों को घेरकर बिना परमिशन बात करने पर कहा कि मिलन समारोह चल रहा है क्या? इसके बाद वहां मौजूद आरोपियों के परिजनों को हटाया गया और वकीलों ने परमिशन लेकर ही अपने पक्षकारों से बातचीत की। इधर ईडी की पूछताछ के बाद अब राजस्व आसूचना निदेशालय या राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी कर सकती है।
जिला अदालत में 18वें अपर जिला न्यायाधीश सचिन कुमार घोष की अदालत में सोमवार दोपहर 1.20 बजे तीनों आरोपियों को पेश किया गया। आरोपियों की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने इस मामले में कोर्ट के माध्यम से ईडी द्वारा तैयार की जा रही डायरी की मांग रखी। वकीलों ने कहा कि ईडी अपनी रिपोर्ट में रिमांड के दौरान की गई पूछताछ की डायरी और उसकी पूरी डिटेल दे। काफी देर तक इस पर बहस चली तो ईडी के वकील की ओर से कहा गया कि यह जानकारी अभी नहीं दी जा सकती है। चार्जशीट में ही जानकारी दी जा सकेगी। सुनवाई के बाद जज प्रोसिंडिंग नोट कराने लगे तो चेतन के वकील ने न्यायाधीश घोष से अपने पक्षकार से बात करने की अनुमति मांगी। इसके बाद शरद जायसवाल के वकील भी वहां आ गए और शरद से बातचीत करने लगे।
कुछ देर तक ऐसा ही माहौल रहा तो न्यायाधीश घोष ने नाराजगी जताते हुए कहा कि मिलन समारोह चल रहा है क्या? साथ ही बिना अनुमति बातचीत पर भी नाराजगी जताई। इसके बाद शरद के वकील ने न्यायाधीश से बात करने की अनुमति ली और फिर उससे चर्चा की। यह बात भी सामने आई कि पिछली सुनवाई में शरद के जो वकील थे वह इस सुनवाई में बदल गए। इस पर भी कोर्ट ने आपत्ति की और कहा कि हर पेशी पर वकील बदल देते हो। इस दौरान कोर्ट में मौजूद शरद जायसवाल, सौरभ शर्मा, चेतन सिंह गौर के परिजनों को कोर्ट रूम से बाहर भी किया गया।
शरद, चेतन करते रहे बात, सौरभ रहा चुप
- जेल भेजने के फैसले के पहले सुनवाई खत्म होने पर कटघरे में खड़े शरद की सबसे अधिक देर तक बात वकील से हुई। वह काफी देर तक वकील और सहयोगियों से बात करता रहा।
- चेतन का वकील भी बीच-बीच में एक ओर खड़े चेतन को बुलाकर उससे बात करता रहा।
- सौरभ शर्मा इस दौरान एक ओर चुपचाप खड़ा रहा। एक बार उसकी मां उसके पास पहुंची और कान में धीरे से कुछ कहा तो ईडी के अफसरों ने आपत्ति की और उन्हें बाहर जाने के लिए कहा।
- कटघरे में खड़े रहने के दौरान सौरभ पूरे समय लगभग चुप ही रहा। कभी-कभार शरद जायसवाल के कुछ कहने पर जवाब देता रहा।
डीआरआई कर सकती है गिरफ्तारी
दूसरी ओर डायरेक्टोरेट आफ रेवेन्यू (डीआरआई) इनोवा कार में मिले गोल्ड के मामले में सौरभ और चेतन की गिरफ्तारी कर सकती है। सोमवार को संभावना जताई जा रही थी कि डीआरआई इनकी गिरफ्तारी और रिमांड के लिए आवेदन कर सकती है लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सूत्रों के अनुसार डीआरआई को ईडी की तरह आरोपियों की गिरफ्तारी के अधिकार हैं।
वकील हरीश मेहता बोले, डायरी के कंटेंट मांगे हैं
आरोपियों की पैरवी कर रहे वकील हरीश मेहता ने कहा कि अभी तक जो भी इन्क्वायरी हुई है। जिस स्टेज से प्रारंभ हुई है और आज जहां पर खत्म हुई है। अभी तक जो भी कार्यवाही हुई है। इसे ऑर्डर शीट में कोर्ट से लेने का आग्रह किया गया है। कोर्ट ने इस पर विचार करने की बात कही है। मेहता ने कार्रवाई और पूछताछ को लेकर कहा कि जो चक्का घूम रहा था, वैसी ही स्थिति है। सौरभ ने पहले भी कहा था कि पैसे और संपत्तियों से उसका कोई सरोकार नहीं है। उनसे पहले भी यही कहा था और आज भी यही कह रहा है। यह प्रापर्टी किसकी है और आगे लोकायुक्त, ईडी क्या कार्यवाही करेगा, यह आने वाले समय में पता चलेगा। मेहता ने कहा कि चेतन ने कहा है कि वह गाड़ी उसके नाम से है। लेकिन उसमें किसने क्या रखा है? यह उसे नहीं मालूम है।




