इंदौर की सेंट्रल जेल में इस बार होली का नजारा बिल्कुल बदला-बदला था। जेल की ऊँची दीवारों के पीछे इस साल ‘बरसाने की होली’ की धूम रही। जहाँ अमूमन सन्नाटा और सख्ती होती है, वहाँ इस बार ढोलक की थाप और फाग गीतों की गूँज सुनाई दी।


डीजी वरुण कपूर ने बढ़ाया कैदियों का उत्साह
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी और अच्छी बात यह रही कि प्रदेश के जेल महानिदेशक (DG) वरुण कपूर खुद अपने परिवार के साथ कैदियों के बीच पहुँचे। उन्होंने किसी बड़े अधिकारी की तरह नहीं, बल्कि एक बड़े भाई की तरह कैदियों के साथ होली खेली। डीजी साहब को अपने साथ रंग खेलते देख कैदी भी भावुक हो गए और पुरानी बातें भूलकर त्योहार के रंग में डूब गए।

बरसाने जैसा सजा जेल परिसर
पूरे जेल परिसर को रंग-बिरंगे गुलाल और सजावट से बरसाने की तर्ज पर सजाया गया था। कैदी टोलियां बनाकर नाचते-गाते दिखे। प्रशासन का मकसद सिर्फ त्योहार मनाना नहीं, बल्कि कैदियों के मन से तनाव को कम करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना था।
- भाईचारे का संदेश: जेल में डीजी वरुण कपूर की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि इंसानियत हर सजा से बड़ी है।
- खुशी का माहौल: ढोलक और मंजीरों के साथ कैदी झूमते नजर आए, जिससे जेल का माहौल खुशनुमा हो गया।
- सुधार की कोशिश: जेल प्रशासन ने बरसाने की थीम पर यह आयोजन कर कैदियों को एक नई और सकारात्मक सोच देने की कोशिश की है।







