पिछले हफ्ते एमपी की मोहन कैबिनेट ने सोयाबीन के लिए भावांतर योजना शुरू करने का निर्णय किया। इस योजना के लिए मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड ने डेढ़ हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने का विज्ञापन निकाला है। भावांतर योजना के लिए मंडी बोर्ड द्वारा लोन लेने को लेकर पूर्व केन्द्रीय मंत्री और एमपी कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने एमपी सरकार पर हमला बोला है।
पहली बार कर्ज लेने टेंडर निकाला गया अरुण यादव ने कहा- मंडी बोर्ड जैसी संस्थाओं के माध्यम से ही किसानों की फसल के दाम और व्यवस्था तय होती है। मंडी बोर्ड से प्रदेश की छोटी बड़ी मंडियों की व्यवस्था चलती हैं। 1974 में पीसी सेठी ने इसका गठन किया था। उसके बाद प्रदेश में जितनी सरकारें आई सबने मंडी बोर्ड को मजबूत करने के बारे में सोचा।
कमलनाथ सरकार में आमदनी 8 करोड़ से बढ़कर 12 करोड़ हुई थी अरुण यादव ने कहा- 2019 में कमलनाथ सरकार में मेरे छोटे भाई सचिन यादव कृषि मंत्री थे। उस समय मंडी बोर्ड का रेवेन्यू सालाना 8 करोड़ से बढ़ाकर 12 करोड़ किया गया था। लेकिन, अब वही मंडी बोर्ड, जो किसानों के हित में काम करती थी, सरकार की भावांतर योजना के लिए लोन दिलाया जा रहा है। सरकार किसानों को पैसा देने के लिए मंडी बोर्ड के लिए 1500 करोड़ रुपए का लोन ले रही है। अभी तक भावांतर का पैसा किसी किसान को मिला नहीं हैं।
अरुण यादव ने कहा-
ये पहली बार सुन रहा हूं एक ऑटोनॉमस बॉडी ने कर्ज का टेंडर निकाला। यह बड़ी हास्यास्पद स्थिति है। सरकार कह रही है कि हम मंडी बोर्ड के लिए लोन लेना चाहते हैं। ये पहली बार हो रहा है कि सरकार कर्ज लेने के लिए टेंडर निकाल रही है।
अरुण यादव ने सरकार से सवाल किया कि, कृषि विभाग सीधे लोन क्यों नहीं ले रहा? पहले तो MSP पर उपज खरीदिए। कृषि मंत्री की नोटशीट में भी लिखा है कि “हम सक्षम नहीं हैं।” किसानों की उम्मीद है कि सरकार जल्द ही उनकी मांगों को सुने और उन्हें MSP के सही दाम दिलाए, ताकि उनकी मेहनत का सही मूल्य मिल सके।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने कहा मध्य प्रदेश में किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पिछले 15 साल से सरकारी संस्थाओं को बेचने का सिलसिला जारी है, लेकिन किसान आज भी अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। दिल्ली में आठ महीने तक किसानों ने MSP को लेकर विरोध किया, लेकिन सरकार ने अब तक इस मांग को पूरा नहीं किया।
शिवराज देश के कृषि मंत्री फिर भी एमपी का किसान परेशान
अरुण यादव ने कहा कि, एमपी भी इससे अछूता नहीं है। प्रदेश में पिछले 18 साल से भाजपा की सरकार है, और 16 साल शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री रहे हैं। आज वही कृषि मंत्री हैं, लेकिन जिस प्रदेश का कृषि मंत्री है, वहीं किसान परेशान हैं।
इस बार मक्का उत्पादन बड़े पैमाने पर हुआ, लेकिन मंडी में दाम केवल 1000-1200 रुपए प्रति क्विंटल रह गए। जबकि किसानों की मांग थी कि MSP कम से कम 5300 रुपए होना चाहिए। तीन हजार 3500 रुपए में सोयाबीन बिक रहा है। औसत उत्पादन मात्र डेढ़ से दो क्विंटल प्रति एकड़ हुआ है। ये 15 साल में सबसे कम उपज हुई। मंडी में फसल बिक नहीं रही, लेकिन व्यापारी सस्ती दर पर उपज खरीद रहे हैं।
सरकारी संस्थाओं को किया जा रहा बंद
पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने देश-प्रदेश की सरकारी संस्थाओं के बारे में बात करते हुए कहा कि, HMT, LIC, BSNL, मध्यप्रदेश का मंडी बोर्ड, बीज निगम, तिलहन संघ जैसी जितनी भी सरकारी संस्थाएं हैं उनको धीरे-धीरे बंद कर के अडाणी, अंबानी जैसे बड़े-बड़े व्यापारियों को दिया जा रहा है। प्रदेश में मंडी बोर्ड की व्यवस्था भी लचर है जितना सपोर्ट सरकार को मंडी बोर्ड को करना चाहिए उतना नहीं कर रही है।




