भोपाल में जयंती मैदान (अंबेडकर मैदान) में शनिवार को राष्ट्रीय न्याय सत्याग्रह के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, लेखकों, युवाओं और समाजसेवियों ने देश के ज्वलंत मुद्दों को लेकर अनशन किया है।
सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चले इस सत्याग्रह में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम ज्ञापन सौंपा।
आयोजकों ने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह अहिंसक है। इसका उद्देश्य न्याय, संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करना है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस पर जूता फेंकने की घटना और सोनम वांग्चुक की गिरफ्तारी लोकतांत्रिक असहिष्णुता का प्रतीक है।
उन्होंने मांग की कि इन दोनों मामलों पर सरकार और न्यायपालिका पारदर्शी और संवैधानिक कदम उठाए।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन से कुल 14 प्रमुख मांगे रखीं
- सोनम वांग्चुक और उनके साथियों की रिहाई।
- डॉ. भीमराव अंबेडकर के अपमान पर कड़ी कार्रवाई हो।
- जानलेवा सिरप से हुई बच्चों की मौत के दोषियों को सजा मिले।
- भोपाल का नाम ‘भोजपाल’ करने के निर्णय को वापस लें।
- बंद सरकारी स्कूलों को पुनः खोलें।
- शिक्षा, स्वास्थ्य और न्याय को समान रूप से निःशुल्क अधिकार बनाना,
- सांसदों-विधायकों की सुविधाएं सीमित करने और उनके लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय हो।
- राजनीति में अपराधीकरण और धार्मिककरण पर रोक लगे।
- संवैधानिक संस्थाओं में सरकारी हस्तक्षेप समाप्त करें।
- चुनावों में EVM के स्थान पर पारदर्शी प्रणाली लागू करने की मांगे शामिल हैं।
जिम्मेदार पर की कार्रवाई की मांग प्रदर्शनकारियों ने आईपीएस पूरन कुमार मीना की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग की। उन्होंने कहा कि मीना को कथित रूप से उच्च अधिकारियों द्वारा जातिगत आधार पर प्रताड़ित किया है।
यह गंभीर मामला है। कार्यक्रम के दौरान कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, कवियों और युवा वक्ताओं ने अपनी बात रखी।
सभी ने एक स्वर में कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत जनता है और संविधान के मूल्यों की रक्षा हर नागरिक का कर्तव्य है।
कार्यक्रम का ज्ञापन उप जिलाधिकारी (एसडीएम) भोपाल के माध्यम से राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट को भेजा गया।
आयोजकों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को राष्ट्रव्यापी रूप दिया जाएगा।




