भोपाल | संगठित समाज ही सशक्त राष्ट्र की नींव रखता है और भारत की असली ताकत उसकी समृद्ध संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत में छिपी है। यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य श्री भैयाजी जोशी ने व्यक्त किए। अवसर था—भोपाल के हर्षवर्धन नगर स्थित ‘प्रज्ञा दीप’ में आयोजित शक्तिधाम न्यास की महत्वपूर्ण बैठक का।
ओंकारेश्वर के समीप बनेगा आध्यात्मिक अनुसंधान का केंद्र
बैठक में मध्यप्रदेश के बड़वाह (खरगोन जिले) में माँ नर्मदा के तट पर बनने जा रहे “शक्तिधाम – शक्ति, श्रद्धा, शास्त्र एवं साधना अनुसंधान केंद्र” की विस्तृत कार्ययोजना पेश की गई। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से महज 15-20 किमी दूर बनने वाला यह केंद्र अपनी तरह का अनूठा प्रोजेक्ट होगा, जहाँ एक ही परिसर में भारत के सभी 51 शक्तिपीठों के दर्शन हो सकेंगे।
स्वास्तिक वास्तु और भारत माता का मंदिर
परियोजना की विशेषता बताते हुए भैयाजी जोशी ने कहा कि मुख्य मंदिर का निर्माण स्वास्तिक आधारित वास्तु पर होगा, जिसके केंद्र में भारत माता की भव्य प्रतिमा विराजमान होगी। यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान और प्राचीन ज्ञान का मिलन स्थल होगा। यहाँ:
- वैज्ञानिक शोध: ध्वनि, ध्यान, ऊर्जा और नर्मदा जल व वनस्पतियों पर रिसर्च की जाएगी।
- डिजिटल आर्काइव: तंत्र, शक्ति उपासना और देवी परंपरा का डिजिटल अभिलेखागार बनेगा।
- समाज कल्याण: गोशाला, जैविक कृषि, ध्यान केंद्र और सेवा इकाइयों के जरिए स्थानीय जनजातीय समाज को रोजगार और शिक्षा से जोड़ा जाएगा।
पर्यटन नहीं, श्रद्धा का केंद्र बने ‘शक्तिधाम’
श्री जोशी ने विशेष जोर देते हुए कहा, “भारत के आध्यात्मिक केंद्रों को केवल पर्यटन स्थल के रूप में नहीं देखना चाहिए। ये श्रद्धा के केंद्र हैं, जहाँ से आम व्यक्ति संस्कार ग्रहण करता है। इन्हीं शक्ति केंद्रों के कारण भारत आज भी अजेय और अमर बना हुआ है।”
गरिमामयी उपस्थिति और संचालन
बैठक में महामंडलेश्वर स्वामी श्री अनिलानंद जी महाराज, विशिष्ट अतिथि श्री रीतेशदास वैरागी और श्री विभाष उपाध्याय सहित 40 गणमान्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। - संकल्पना: शक्तिधाम की परिकल्पना श्री राकेश शर्मा ने प्रस्तुत की।
- संचालन: बैठक का कुशल संचालन श्री राम शर्मा ने किया।
- आभार: कार्यक्रम के अंत में श्री तरुण गुप्ता ने सभी का आभार माना।
बैठक का समापन राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत ‘वंदेमातरम’ के गायन के साथ हुआ, जो राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और सुदृढ़ कर गया।










