एक मां का अपने बेटे के प्रति अगाध प्रेम बहू को रास नहीं आया। दोनों के बीच विवाद हुआ जो कोर्ट तक चला गया। बाद में वन स्टाप सेंटर ने मामले को सुलझा दिया। भावना देवी (परिवर्तित नाम) ने कोर्ट में बहू स्मिता (परिवर्तित नाम) के खिलाफ घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना का केस किया था। मामले को वनस्टाप सेंटर को भेजा गया।
प्रशासक वंचना सिंह परिहार ने बताया कि भावना देवी को बुलाकर कथन लिए गए, तब पता चला कि बहू चार माह से मायके रह रही है और घर नहीं आ रही। विवाह को 11 माह हुए हैं। सास भावना का आरोप था कि बहू मुझे परेशान करती थी। इसके बाद सभी को परामर्श के लिए बुलाया गया। केस वर्कर मोनिका जो इस प्रकरण में कोर्ट के प्रतिवेदन का काम देख रहीं थीं, उन्होंने काउंसलिंग की तो स्पष्ट हुआ कि सास भावना अनावश्यक रूप से बहू पर प्रताड़ना और घरेलू हिंसा का केस दर्ज कर बैठी है। इसके बाद बहू स्मिता (परिवर्तित नाम) और बेटे सुबोध को परामर्श के लिए बुलाया गया। इसमें पता चला कि सास पुराने विचारों की है, उसने बहू-बेटे को कोई भी निर्णय लेने का अधिकार नहीं दिया। हर बात में अपने 30 वर्षीय बेटे के निर्णय खुद ही लेती रही। बेटा खलघाट में काम करता है और शादी के बाद वहीं रहने लगा। इधर बहू सास के साथ रहती थी। 15 दिन में एक बार बेटा घर आता था।
पति-पत्नी के बीच में न आएं – परामर्श के दौरान भी सास भावना हर बात में अपनी सोच बयान करती रही। मामले की मूल समस्या को समझते हुए सास भावना को समझाया गया कि वे पति-पत्नी के रिश्ते के बीच में न आएं। परिहार ने बताया कि सुबोध को समझाया कि स्मिता ने तुमसे विवाह किया है। पत्नी का अधिकार है तुम्हारे साथ रहना।इसलिए जहां रहोगे पत्नी को अपने साथ ही रखोगे। स्मिता को भी समझाया कि अपने माता-पिता को अपनी तकलीफ बताना तुम्हारा अधिकार है, पर छोटी छोटी बातें उन तक जाने से गलत फहमियां बढ़ती हैं। जहां तक संभव हो पति-पत्नी खुद समस्या सुलझा लें। सास भावना से कहा कि आप बेटा-बहू के रिश्ते के बीच में आओगी तो बेटा भी खुश नहीं रह पाएगा। इसके बाद भावना ने कोर्ट से केस वापस लेने का आवेदन दिया।




