। सैनिक स्कूल के लिए 100 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल गई है। मध्यप्रदेश का यह दूसरा सैनिक स्कूल चंबल अंचल के मालनपुर में खुलेगा। इसमें 600 बच्चे अध्ययन करेंगे। पहला सैनिक स्कूल रीवा में 20 जुलाई 1962 को खोला गया था। इस स्कूल के लिए मंजूरी कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा मुरैना-श्योपुर क्षेत्र के सांसद नरेंद्र सिंह तोमर के प्रयासों से मिली है। श्री तोमर ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को धन्यवाद दिया है, वहीं भूमि देने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार माना है।
चंबल अंचल में सैनिक स्कूल खोलने की मांग कुछ वर्षों से हो रही थी। यह विषय केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की प्राथमिकता में रहा है। इस सैनिक स्कूल को खोले जाने के लिए केंद्रीय मंत्री तोमर ने प्रारंभ से ही शासन-प्रशासन के स्तर पर अपनी ओर से पहल की थी। तोमर ने अफसरों के साथ औद्योगिक क्षेत्र मालनपुर में यह सैनिक स्कूल संचालित किए जाने के लिए उस जमीन का भी निरीक्षण किया था, जहां स्कूल का निर्माण होना है। यह स्कूल खोले जाने के लिए पूर्व में तोमर के प्रयासों से लगभग 50 हेक्टेयर जमीन राज्य सरकार द्वारा आवंटित की गई थी। पिछले कुछ समय में तोमर ने एकाधिक बार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तथा रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अफसरों से चर्चा की थी और उन्हें पत्र भी लिखा था। साथ ही, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी सैनिक स्कूल जल्द से जल्द प्रारंभ किए जाने को लेकर बातचीत की थी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दिशा-निर्देशों पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा अब 100 करोड़ रुपये मध्य प्रदेश सरकार को दिए जाने की मंजूरी प्रदान कर दी गई है। रक्षा मंत्रालय की सैनिक स्कूल सोसायटी के साथ समन्वय करते हुए प्रदेश सरकार निर्धारित एजेंसी से सुसज्जित सैनिक स्कूल का निर्माण करेगी। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग और रक्षा मंत्रालय के संगठन के बीच समझौता ज्ञापन भी होगा तथा आवश्यक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी की जाएगी। तोमर के मुताबिक, यह एक महत्वाकांक्षी परियोजना है और इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण भी है। रक्षा मंत्रालय द्वारा अपनी परियोजनाओं को प्रदेश में प्रारंभ करने के बदले यहां सैनिक स्कूल खोलना पूर्व में, वर्ष 2017 में तय हो चुका था लेकिन कुछ प्रशासनिक वजहों से स्कूल के लिए धनराशि पहले मंजूर नहीं हो पाई थी लेकिन अब पूरी 100 करोड़ की राशि भी रक्षा मंत्रालय की ओर से मंजूर होने से यह सैनिक स्कूल खोले जाने में अब कहीं-कोई अड़चन नहीं है।




