गजेंद्र विश्वकर्मा, इंदौर। मध्यप्रदेश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग संस्थान श्री गोविंदराम सेकसरिया प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (एसजीएसआइटीएस) ने कार्बन उत्सर्जन की बढ़ती समस्या को देखते हुए नवाचार किया है। इसके तहत संस्थान अब इंजीनियरिंग की शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को कार्बन उत्सर्जन कम करने और कार्बन क्रेडिट का लाभ कैसे लिया जा सकता है इसकी शिक्षा दी जाएगी। संस्थान सप्ताह में एक दिन अपने पांच हजार विद्यार्थियों को कार्बन उत्सर्जन से पर्यावरण को हो रहे नुकसान और इसे कम करने के तरीकों के साथ कार्बन क्रेडिट कैसे ले सकते हैं, इस बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए संस्थान ने अपने 32 एकड़ परिसर की ज्यादातर बिल्डिंगों में प्राकृतिक ऊर्जा का उपयोग शुरू कर दिया है। 50 प्रतिशत से ज्यादा बिजली का उपयोग सौर ऊर्जा से किया जा रहा है। परिसर के अंदर की स्ट्रीट लाइट को इसी से चलाया जा रहा है। ग्रीन परिसर के लिए हर जगह हरियाली को बढ़ाया जा रहा है और कम से कम ऊर्जा के उपयोग पर ध्यान दिया जा रहा है।
कंपनियां ऐसे कर्मचारियों को वरीयता देगी जो नुकसान को कम करने में सहायक हो
संस्थान प्रदेश का पहला शिक्षण संस्थान होगा जो कार्बन क्रेडिट से कमाई करेगा। इसके लिए हाल ही में स्मार्ट सिटी कंपनी के साथ संस्थान का समझौता हुआ है। इसमें कंपनी के विशेषज्ञ और संस्थान के प्रोफेसर्स साथ में मिलकर ज्यादा से ज्यादा कार्बन क्रेडिट का लाभ लेने के लिए काम कर रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया से विद्यार्थियों को भी अवगत कराया जाएगा। संस्थान के निदेशक प्रो. राकेश सक्सेना का कहना है दुनिया के सभी देश ग्रीन हाउस गैसों को कम करने के लिए काम कर रहे हैं। विद्यार्थी डिग्री पूरी करने के बाद जिस उद्योग या कंपनी में जाएंगे वहां भी निश्चित तौर पर कार्बन उत्सर्जन को कम करने पर काम हो रहा है।
ऐसे में उद्योग और कंपनियों के लिए ऐसे कर्मचारी ज्यादा फायदेमंद होंगे जो छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर उत्सर्जन को कम कर सके। जैसे काम पूर्ण होने के बाद एसी, पंखे, टीवी, कूलर, कंप्यूटर और अन्य मशीनरी बंद कर दी जाए। कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रानिक्स, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, सिविल इंजीनियरिंग हो या एमबीए डिग्री करने वाले विद्यार्थी। हमारा मकसद है कि कालेज में ही अगर विद्यार्थियों को कार्बन से होने वाले नुकसान और इसे रोकने के उपायों के बारे में अच्छे से जानकारी मिल जाए।
शहर ऐसे कार्बन क्रेडिट में भी बन रहा है नंबर वन
स्मार्ट सिटी कंपनी ने 2020-21 में 69 हजार 506 टन कार्बन क्रेडिट से 9 करोड़ रुपये कमाएं है। ऐसा करने वाला इंदौर देश का पहला शहर बन गया है। एक हजार किलोग्राम कार्बन डाइआक्साइड कम करने पर एक कार्बन क्रेडिट मिलता है। एक कार्बन क्रेडिट के लिए 150 से 350 रुपये तक की राशि मिलती है।
इस तरह की सीख देगा कालेज
– ग्रीन हाउस गैसों से पर्यावरण को क्या नुकसान हो रहा है और इसके लिए उत्सर्जन को कैसे कम कर सकते हैं।
– घर, दफ्तर और रोजाना के काम के दौरान कैसे ऊर्जा का उपयोग कम कर सकते हैं और प्राकृतिक ऊर्जा को बढ़ावा दे सकते हैं।
– कार्बन क्रेडिट कैसे लिया जाता है और इससे कैसे और कितनी कमाई की जा सकती है।
– कंप्यूटर, मोबाइल, वाहन में कम से कम ऊर्जा लगे इसके लिए किस तरह से ऐसी चीजों का उपयोग करना चाहिए।
– कोई उत्पाद बनाते समय कौन सी बातें ध्यान रखें जिससे की पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो।
स्मार्ट सिटी कंपनी करेगी मदद
एसजीएसआइटीएस के साथ हमारा समझौता हुआ है। इसके तहत संस्थान द्वारा किए जा रहे कम्पोस्ट खाद और ऊर्जा सरंक्षण के लिए किए जा रहे कामों के लिए संस्थान को कार्बन क्रेडिट दिलाने में मदद करेंगे।
– ऋषभ गुप्ता, सीईओ, स्मार्ट सिटी कंपनी




