विद्युत वितरण और जेनरेशन, ट्रांसमिशन कंपनियों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों का 90 से 100 किमी दूर ट्रांसफर किया जा रहा है। महज 10 हजार की सैलरी पाने वाले इन कर्मचारियों ने कंपनियों के इस कदम को प्रताड़ना और नौकरी ने निकालने वाला बताया है। हालांकि ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने भरोसा दिलाया है कि ऐसा नहीं होगा। इसकी जांच कराएंगे और इन कर्मचारियों को अधिकतम 5 से 8 किमी दूर पदस्थ करेंगे।
ऊर्जा मंत्री तोमर से इस मुद्दे को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि यह मामला अभी मेरे संज्ञान में आया है। इसको लेकर एमडी से बात करेंगे। इन कर्मचारियों का तबादला सौ किमी दूर नहीं किया जाएगा। अगल-बगल के 5 से 8 किमी दूरी के सब स्टेशन में उन्हें रखा जाएगा, ताकि व्यवस्था भी बनी रहे। जिनका स्थानांतरण सौ किमी दूर तक किया गया होगा, उनका तबादला इतनी दूर तक कभी नहीं होगा। विभाग इसका ध्यान रखेगा। कर्मचारियों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। बता दें कि सबसे अधिक आउटसोर्स कर्मचारी बिजली कंपनियों में ही कार्यरत हैं।
दस से 12 हजार रुपए ही मिलती है सैलरी
बिजली कंपनी में आउटसोर्स पर कम्प्यूटर आपरेटर, लाइन अटेंडेंट, सब स्टेशन आपरेटर समेत अन्य पदों पर आउटसोर्स में कर्मचारी रखे जाकर उन्हें महीने में अधिकतम दस से बारह हजार रुपए तक की सैलरी दी जा रही है। हालात यह हैं कि दस साल से इन कर्मचारियों को दस हजार रुपए से अधिक नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में अपने परिवार का मामूली से वेतन में भरण पोषण कर रहे इन कर्मचारियों को सौ किमी दूर स्थानांतरित करने के फरमान के बाद अब उनकी यह नौकरी भी जाने का खतरा बन गया है क्योंकि दस हजार रुपए के लिए सौ किमी दूर तक तो कोई जा नहीं पाएगा।
मुरैना को लेकर थीं शिकायतें, असर पूरे मध्य क्षेत्र रीजन पर
बताया जाता है कि मुरैना के आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर कुछ शिकायतें थीं और उन्हें हटाकर इधर-उधर करने के लिए कहा गया था, लेकिन विद्युत वितरण कंपनियों के एमडी और अधीनस्थ अधिकारियों ने तबादले का क्षेत्र सौ किमी दूर तक कर दिया है। इसलिए अब 33 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों वाले विद्युत वितरण कंपनी, पावर जेनरेशन कंपनी और ट्रांसमिशन कंपनी के कर्मचारियों में विरोध की स्थिति बन रही है।




