मध्य प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेजों को डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं। इस समस्या को हल करने के लिए राज्य शासन ने श्योपुर और सिंगरौली में नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों के लिए ऑटोनॉमस मेडिकल कॉलेज के 11 सीनियर मेडिकल टीचर्स (डॉक्टरों) को ट्रांसफर किया है। जिनके भरोसे इन कॉलेजों को सत्र 2025-26 के लिए 5 साल के एमबीबीएस कोर्स की मान्यता लेने की तैयारी है।
खास बात यह है कि यह सभी सीनियर फैकल्टी हैं। जिनकी एक से तीन साल की ही नौकरी बची है। वहीं, इनके अपने मूल्य विभाग से जाने से इसका असर पुराने मेडिकल कॉलेजों में एमडी कर रहे पीजी स्टूडेंट्स पर भी पड़ेगा। बता दें, एक प्रोफेसर पर एनएमसी से 4 पीजी सीटों की एनएमसी मान्यता देती है। नए मेडिकल कॉलेजों में इनके स्थान पर जल्द नए प्रोफेसर की नियुक्ति करनी होगी। जिससे नए मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटें शुरू करने के चक्कर में पुराने मेडिकल कॉलेजों की एमडी सीटें ना कैंसिल हो जाएं।
पीजी स्टूडेंट्स सीधे होंगे प्रभावित
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. कुलदीप गुप्ता ने कहा कि एक चिकित्सा महाविद्यालय से चिकित्सा शिक्षक के ट्रांसफर से वहां पर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे पीजी डॉक्टर के ऊपर सीधा असर पड़ेगा। क्योंकि, पीजी के दौरान जिस प्रकार से टीचिंग, ट्रेंनिग, रिसर्च और थीसिस करनी होती है वह प्रोफेसर के मार्गदर्शन में होती है। लगभग सभी प्रक्रिया पूरी हो गई हैं, अब यदि यह प्रोफेसर दूसरे कॉलेज चले जाएंगे तो इन बच्चों का एग्जाम कौन कराएगा। प्रोफेसर नहीं होंगे तो इन सब चीजों से पीजी डॉक्टर वंचित हो जाएंगे। इस आदेश के बाद से बच्चे चिंतित हैं।




