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497 बेटियां पढ़ाई से हुई दूर…फिर बांधेंगे शिक्षा की डोर

जिले में फिर से बेटियों को शिक्षा से जोड़ने की कवायद शुरू होगी। पाठशाला त्यागी बालिकाओं को पुन अपनी शिक्षा नियमित करने के उद्देश्य से महिला बाल विकास विभाग द्वारा जिले में 7 मार्च से कन्या शिक्षा प्रवेश उत्सव अभियान शुरू किया जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य 11 से 14 वर्ष की शाला त्यागी बालिकाओं को पहचान कर उनको स्कूलों में पुन प्रवेश कराया जाएगा। जिले में करीब 497 बालिकाएं हैं जिन्होंने स्कूल छोड़ दिया है। ऐसी बालिकाओं का फिर से कन्या शिक्षा प्रवेश उत्सव के तहत शिक्षा से जोड़ा जाएगा। जिले में सबसे ज्यादा स्कूल छोड़ने की संख्या बागली, कन्नाौद और खातेगांव में सामने आई हैं। महिला बाल विकास विभाग ऐसी सभी किशोरियों की शिक्षा पर जोर देगी, जिन्होंने बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ दी है। इस अभियान के माध्यम से यह कोशिश की जाएगी कि ज्यादा से ज्यादा बालिकाएं शिक्षित हो सकें। वर्ष 2015 में शुरू किए गए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का सम्पूर्ण लक्ष्‌य बालिका के जन्म का उत्सव मनाना और उनको शिक्षित कर सक्षम बनाना है। महिला-बाल विकास विभाग द्वारा प्रतिवर्ष अप्रैल माह में सर्वे कराया जाता है। इसमें 11 से 14 वर्ष की ऐसी किशोरियों की जानकारी एकत्र की जाती है, जिन्होंने स्कूल छोड़ दिया है। स्कूल में प्रवेश नहीं लिया है या एक बार एडमिशन तो लिया है, लेकिन स्कूल नहीं जा रही। या फिर कुछ समय जाकर स्कूल जाना बंद कर दिया है। ऐसी हितग्राही बालिकाओं को टेक होम राशन भी दिया जाता है।

-आर्थिक स्थिति खराब होती, स्कूल दूर होने भी एक कारण

डाइट प्रचार्य और जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी डाक्टर राजेंद्र सक्सेना ने बताया कि बालिकाओं के शिक्षा से दूर होने के कई कारण होते हैं।

सबसे बड़ा शिक्षा भी है। कई माता पिता ज्यादा पढ़े लिखे नहीं होते हैं। इसलिए वो बच्चों को ज्यादा शिक्षा दिलवाने में रूचि नहीं रखते हैं। बच्चे पढ़ाई में कमजोर होने पर स्वजन स्कूल छुड़वा देते हैं। वहीं इलाकों में स्कूलों की दूरी भी बालिका को स्कूल छोड़ने पर मजबूर करती हैं।

सक्सेना ने बताया कि हम प्रयास कर रहे है कि बच्चों को स्कूल लाने लाया जाए। साक्षर भारत कार्यक्रम चलेगा। उसमें 1 अप्रैल से भी जोड़ने की कवायद करेंगे। लगातार जागरूक भी किया जाएगा।

-बागली ब्लाक में सबसे ज्यादा बेटियों ने स्कूल छोड़ा

जिले में बागली ब्लाक में सबसे ज्यादा बालिकाओं ने स्कूल छोड़ा। इस इलाके में ज्यादा मजदूर परिवार मजदूरी के लिए पलायन करते हैं। साथ ही आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं होने से स्वजन बेटियों की शिक्षा पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं।

जिले में इतनी बेटियां ने स्कूल छोड़ा

ब्लाक-शाला त्यागी बालिकाओं की संख्या

1-देवास-87

2-सोनकच्छ-67

3-टोंकखुर्द-38

4-बागली-190

5-कन्नाौद-28

6-खातेगांव-87

कुल-497

पिछले साल करीब 2 हजार से ज्यादा शाला त्यागी बालिकाओं का आंकड़ा सामने आया था। इस बार बहुत ही कम हैं। 365 दिनों में हम तीन सौ दिन बालिकाओं को टेक होम राशन देते हैं। इस बच्चों को शिक्षा प्रति जागरुक किया जाता है।

-रेलम बघेल, जिला परियोजना अधिकारी, देवास

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