अभाविप ने किया भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर ‘जनजाति छात्र अध्ययन अनुभव यात्रा’ का आयोजन
छात्रों का उच्च शिक्षा मंत्री से संवाद एवं विधानसभा का भ्रमण
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, मध्यभारत प्रांत द्वारा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर 12 से 14 मई 2025 तक भोपाल में ‘जनजाति छात्र अध्ययन अनुभव यात्रा’ का आयोजन किया गया। यह तीन दिवसीय यात्रा जनजातीय छात्रों को भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और शैक्षणिक विरासत से जोड़ने का प्रयास है, जो उन्हें आत्मविकास, नेतृत्व और राष्ट्र सेवा की दिशा में प्रेरित करती है।
पहला दिन: सांस्कृतिक व शैक्षणिक स्थलों का अवलोकन
यात्रा के पहले दिन प्रतिभागी छात्रों ने मैनिट (MANIT), बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, जनजातीय संग्रहालय और पीपुल्स मॉल का भ्रमण किया। इन स्थलों से छात्रों को तकनीकी, अकादमिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों की समृद्ध जानकारी प्राप्त हुई। इस अनुभव से छात्रों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रप्रेम की भावना का भी विकास हुआ।
दूसरा दिन: विधानसभा भ्रमण और मंत्री से संवाद
यात्रा के दूसरे दिन उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार से संवाद किया। छात्रों ने मध्यप्रदेश विधानसभा का भ्रमण किया जिसमें अपर मुख्य सचिव अवधेश प्रताप सिंह ने विधानसभा के कार्य की चर्चा की। इसके अलावा स्कोप ग्लोबल यूनिवर्सिटी का भी भ्रमण किया गया, जिसमें अलग-अलग स्किल एजुकेशन की जानकारी ली।
छात्रों ने मंत्री जी से समस्याओं और शिक्षा संबंधी चुनौतियों पर खुलकर प्रश्न किए।
प्रश्न 1: ग्रामीण क्षेत्रों में मातृभाषा में शिक्षा कब से शुरू होगी?
उत्तर:“मध्यप्रदेश में शिक्षा धीरे-धीरे हिंदी भाषा में प्रारंभ हो रही है। मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में चालू हो चुकी है और अन्य पाठ्यक्रम भी इसी दिशा में बढ़ रहे हैं।”
प्रश्न 2:चुनाव के समय स्कूल-कॉलेजों का उपयोग क्यों होता है?
उत्तर:“इसके समाधान के लिए ‘एक देश, एक चुनाव’ आवश्यक है, जिससे शैक्षणिक संस्थानों की नियमितता बनी रहे।”
प्रश्न 3:परिसर में छात्राएं कम क्यों आती हैं?
उत्तर:“हम ‘सार्थक ऐप’ लाने जा रहे हैं जिससे छात्रों और शिक्षकों की अटेंडेंस दर्ज होगी, उपस्थिति बढ़ेगी और जवाबदेही भी आएगी।”
प्रश्न 4:कोरकू और गोंड भाषाएं शिक्षा में कब जुड़ेंगी?
उत्तर:“अभी तीन भाषाओं को जोड़ा गया है, आगे और भी भाषाएं जोड़ी जाएंगी। शिक्षकों को दो भाषाएं सीखनी होंगी ताकि छात्रों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाया जा सके।”
प्रश्न 5: राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
उत्तर:“हमारी शिक्षा नीति अपनी भाषा, संस्कृति और परंपरा को केंद्र में रखती है ताकि भारत के विद्यार्थी भारत की आत्मा को समझें और 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने में भागीदारी निभाएं।”
इंदर सिंह परमार जी ने कहा—
“भारतीय ज्ञान परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। ज़िंक निर्माण की तकनीक सबसे पहले भारत में विकसित हुई थी। हमारे आदिवासी आज भी सक्षम हैं।”
“आर्यभट ने पृथ्वी का व्यास निकाला, लेकिन यह अंग्रेजों की शिक्षा प्रणाली में नहीं पढ़ाया गया।”
“रोमन में गिनती लिखना कठिन है, लेकिन भारत द्वारा दिया गया ‘शून्य’ आज भी गणना की रीढ़ है।”
“भारतीय भाषाएं जोड़ने का कार्य करती हैं, तोड़ने का नहीं। प्रत्येक विश्वविद्यालय को एक भारतीय भाषा में पढ़ाई करवाने का विचार है।”
“नालंदा विश्वविद्यालय की चिकित्सा पद्धति इतनी उन्नत थी कि खिलजी तक का इलाज वहां हुआ था। ऐसी विद्याएं केवल भारत में थीं।”
“2047 में भारत सूर्य ऊर्जा से अपनी और दूसरों की आवश्यकताएं पूरी करेगा। हमारे किसान आत्मनिर्भर हो रहे हैं और अब भारत पोषण करने वाला देश बनेगा।”
प्रांत मंत्री श्री केतन चतुर्वेदी जी ने कहा—
“अभाविप सदैव छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। ‘जनजाति छात्र अध्ययन अनुभव यात्रा’ न केवल छात्रों को भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जोड़ने का काम करेगी, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक चेतना भी विकसित करेगी।
इस यात्रा के माध्यम से ऐसे विद्यार्थी जो कभी भोपाल नहीं आए इसे विद्यार्थियों को देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों का एक एक्पोजर मिला है जो आने वाले भविष्य में उनको राष्ट्रीय संस्थानों में एडमिशन लेने की प्रेरणा प्रदान करेगा और उनके जीवन पर सकारात्म प्रभाव इस यात्रा से होने वाला है ।
समापन समारोह में छात्रों ने किया अनुभव कथन
छात्रों ने कहा इस एक्सपोजर विजिट से अपनी संस्कृति को जाना है। पहले की जनजातीय पहचान जानने का मौका मिला।
इस विजिट ने हमको अपने आप को निखारने का मौका दिया है।
समापन भाषण में प्रांत संगठन मंत्री रोहित दुबे ने कहा कि—
अभाविप एक दिशा देने वाला ऑर्गेनाइजेशन है। एबीवीपी दिशा देने का काम 75 सालों से कर रही है। बहुत से लोग भाषा, रंग, संस्कृति के आधार पर भारत को तोड़ने का प्रयास करते रहे, परन्तु असफल रहे।
भारत के अंदर ‘सर’ बोलने की परंपरा अंग्रेजों ने थोपी, यह आज जनजातीय क्षेत्र में भी पहुंच रही है जिससे जनजातीय संस्कृति खतरे में है।
भारत को एक करने का काम हम सब कर रहे हैं।
जनजाति छात्र अध्ययन यात्रा का मतलब है कि सभी एक साथ रहकर भारत के लिए काम करें।
यह एक्सपोजर विजिट एजुकेशनल संस्थानों को जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए था, जिससे वहां के छात्र भी बड़े-बड़े कॉलेजों में पढ़ सकें। एबीवीपी चाहती है कि हर गांव से IAS निकले, डॉक्टर निकले, इंजीनियर निकले, तब ये गांव विकसित होंगे।
यह यात्रा सिर्फ दो दिन की यात्रा नहीं है। यह यात्रा जीवन में परिवर्तन की यात्रा है।
2047 का भारत कॉलेज का युवा बनाएगा क्योंकि उस समय यही युवा भारत का नेतृत्व कर रहे होंगे।




