कोविड-19 अलर्ट के बीच एम्स भोपाल में टास्क फोर्स का गठन किया गया है। प्रबंधन के अनुसार यह टीम किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी रूप से निपटने के लिए बनाई गई है। आरटी-पीसीआर जांच भी हो रही है, जिससे कोविड संक्रमण की सटीक पहचान संभव है। एम्स ने इसको लेकर सोमवार को आधिकारिक सूचना जारी की है। जिसमें आम नागरिकों से अपील की गई है कि यदि किसी व्यक्ति में कोविड जैसे लक्षण हों या पॉजिटिव व्यक्ति के संपर्क में आएं हों, तो वह जांच जरूर कराएं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस का सब-वेरिएंट JN.1 ही दक्षिण एशिया में कोविड-19 के बढ़ते मामलों के लिए जिम्मेदार है।
JN.1 वैरिएंट के लगभग लगभग 30 म्यूटेशन
कोरोना वायरस का JN.1 वैरिएंट, ओमिक्रॉन के BA2.86 का एक स्ट्रेन, इन दिनों चर्चा में है। इसमें लगभग 30 म्यूटेशन हैं, जो इम्यूनिटी को कमजोर कर सकते हैं। हालांकि, एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि JN.1 तेजी से फैलता है, लेकिन गंभीर बीमारी पैदा नहीं करता। दुनिया के कई हिस्सों में यह अब भी सबसे आम वैरिएंट है।
कोविड जनरल वार्ड किया सक्रिय
एक डेडिकेटेड कोविड जनरल वार्ड सक्रिय किया गया है। यहां 6 आइसोलेशन बेड की व्यवस्था की गई है। एक आईसीयू भी तैयार किया गया है। जिसमें वेंटिलेटर की सुविधा भी उपलब्ध है।
घबराने की आवश्यकता नहीं
एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने नागरिकों से घबराने की बजाय सतर्क रहने का आग्रह किया है।उन्होंने कहा कि कोविड-19 के संभावित खतरे को देखते हुए एम्स भोपाल ने अपनी तैयारियों को मजबूत किया है। संस्थान समय पर जांच और बेहतर हेल्थ सर्विसेज देने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा लक्ष्य है कि हर नागरिक तक सही जानकारी पहुंचे और भय के बजाय सतर्कता को प्राथमिकता दी जाए।




