जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने ओमती थाने में पदस्थ एक पुलिस आरक्षक को 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरक्षक का नाम नितेश शुक्ला है, जिसने फरियादी के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज करवाने का दबाव बनाते हुए 25 हजार रुपए रिश्वत की मांग की और गाड़ी रख ली थी।
बाद में थाने में खड़ी गाड़ी छोड़ने के नाम पर 5 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की। जिसकी शिकायत फरियादी ने लोकायुक्त पुलिस से की थी। सोमवार को आरोपी नितेश को थाने के बाहर से लोकायुक्त ने गिरफ्तार किया है। लोकायुक्त पुलिस ने इस मामले में सब इंस्पेक्टर को भी जांच के दायरे में लिया है।
तीन दिन थाने के कटवाए चक्कर जबलपुर के अंधेरदेव में रहने वाले शिवम चौरासिया की हार्डवेयर शाॅप है, उन्हें अपना व्यापार बढ़ाने के लिए पैसों की जरूरत थी, उन्होंने अपने दोस्त आयुष सोनी से संपर्क किया, और सोने के दो कंगन देते हुए साढ़े तीन लाख रुपए मांगे। आयुष ने शिवम से चूड़ी तो ले लिया, पर उसके बदले पैसे नहीं दिए, शिवम ने उसके घर के कई चक्कर काट पर पैसे नहीं मिले।
परेशान होकर शिवम ने ओमती थाने में आयुष के खिलाफ आवेदन दिया, जिसके लिए पुलिस ने ना सिर्फ कई चक्कर कटवाए, बल्कि फरियादी की ही बाइक यह कहते हुए जब्त कर ली कि उसने सोने के नकली कंगन दिए है। शिवम ने लोकायुक्त पुलिस को बताया कि 27 मई को जब वह थाने गया तो उससे यह कहा गया कि आवेदन में गलती है, फिर से लिखकर लाओ।
इसके बाद फरियादी अगले दिन 28 मई को फिर थाने गया जहां पर कि आरक्षक ने एसआई शिवगोपाल गुप्ता से मिलवाया, जहां कहा गया कि शिकायत पत्र में बहुत गलतियां है, और आयुष को तुमने जो सोने के कंगन दिए है, वह नकली है, जिसके कारण तुम्हारे खिलाफ ही मुकादम दर्ज किया जाएगा। शिवम 29 मई को फिर से जब ओमती थाने गया, तो वहां पर उसकी बाइक को जब्त कर लिया गया।

फरियादी की ही गाड़ी रख ली पुलिस ने रिश्वतखोर पुलिस आरक्षक नितेश शुक्ला ने शिवम का आवेदन लेकर एसआई से मिलवाया, जिसके बाद दोनों ने धमकाया कि 25 हजार रुपए लेकर आओ, नहीं तो नकली सोने के कंगन बेचने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भिजवा देगें। इतनी ही नहीं पुलिस ने शिवम को वो गाड़ी भी जब्त कर रख ली, जिसे कि वह अपने दोस्त से मांगकर लाया था।
शिवम बार-बार थाने के चक्कर काट रहा था, और गाडी मांग रहा था, पर हर बार पुलिस आरक्षक थाने से उसे भगा दिया करते थे, परेशान होकर शिवम ने जबलपुर लोकायुक्त एसपी से संजय साहू से मुलाकात कर पूरी घटना बताई।
शिकायत पाई गई सही लोकायुक्त एसपी ने शिवम की शिकायत का परीक्षण करवाने के बाद पाया कि वाकई में ना सिर्फ ओमती थाने में पदस्थ आरक्षक और एसआई उसे परेशान कर रहे थे, बल्कि फरियादी की ही बाइक को जब्त कर लिया था, और उस बाइक को छोड़ने के लिए 5 हजार रुपए मांग रहे थे।
सोमवार को जैसे ही पुलिस आरक्षक ने ओमती थाने के बाहर रिश्वत के रुपए लिए, वैसे ही लोकायुक्त ने उसे गिरफ्तार कर लिया, और फिर सार्किट हाउस दो में लाकर कार्रवाई की। डीएसपी सुरेखा परमार ने बताया कि जिस दौरान आरक्षक को गिरफ्तार किया था, उस समय वह वर्दी में था, और ड्यूटी पर था।




