शिवराज सरकार ने विधानसभा चुनाव जीतने के मकसद से अलग-अलग समाजों के लिए 14 बोर्ड बनाए थे। अब इनमें से परशुराम बोर्ड को छोड़कर बाकी सभी बोर्ड भंग कर दिए गए हैं। इनके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति भी खत्म कर दी गई है। इस संबंध में आदेश संबंधित विभागों ने दो दिन पहले जारी किए। 14 में से 9 बोर्ड तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विभाग के अधीन थे। इनकी घोषणा मई-जून 2023 में हुई थी और अक्टूबर 2023 में कैबिनेट से मंजूरी मिली थी।
विभाग की तरफ से 17 सितंबर को जारी आदेश में लिखा गया कि 7 जुलाई 2025 को बोर्ड का दो साल का कार्यकाल पूरा हो गया है। इसलिए अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति समाप्त की जाती है। सभी सामाजिक बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्य प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को पत्र लिख चुके हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा को विधानसभा और लोकसभा चुनाव जिताने में उन्होंने सहयोग दिया, लेकिन अब उपेक्षा की जा रही है।
हुनर सिखाने से पहले ही खत्म हुए बोर्ड
तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत कुशवाह समाज के लिए मप्र कुश कल्याण बोर्ड, सोनी समाज के लिए स्वर्णकला बोर्ड, साहू समाज के लिए तेलघानी बोर्ड, मीना समाज के लिए जय मीनेष बोर्ड, कीर समाज के लिए मां पूरी बाई कीर बोर्ड, विश्वकर्मा समाज के लिए विश्वकर्मा बोर्ड, जाट समाज के लिए वीर तेजाजी बोर्ड और रजक समाज के लिए कल्याण बोर्ड बनाए गए थे। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अंतर्गत पाल समाज के लिए मां अहिल्या देवी बोर्ड और गुर्जर समाज के लिए देवनारायण बोर्ड बनाए गए।
हाल ही में जैन बोर्ड भी बना था। इनमें से केवल देवनारायण बोर्ड और मां अहिल्या देवी बोर्ड को 10-10 लाख रुपए का बजट मिला। वहीं, सामाजिक न्याय विभाग का परशुराम बोर्ड अब भी सक्रिय है। इसके अध्यक्ष पंडित विष्णु राजौरिया ने कहा- “हमारा बोर्ड अलग है और चल रहा है।”
‘झुनझुना पकड़ा कर इस्तेमाल किया’
समग्र पिछड़ा वर्ग सामाजिक संगठन के प्रदेश संयोजक राम विश्वास कुशवाह ने कहा- “जब पार्टी को चुनाव में जीत की जरूरत थी, तब इन संगठनों को झुनझुना पकड़ा दिया। राजनीतिक लाभ लेने के बाद इन्हें खत्म कर दिया। सरकार को इनका कार्यकाल बढ़ाना चाहिए।”




