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BMHRC की नर्सिंग स्टूडेंट मौत केस से जुड़े वीडियो वायरल

भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (BMHRC) की नर्सिंग स्टूडेंट शुभांगिनी (23) की मौत के बाद छात्रों में नाराजगी है। दो दिन बीत जाने के बाद गुरुवार को इससे जुड़े वीडियो सामने आए हैं। जिन्हें छात्रों ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है।

वायरल वीडियो में इल्ली और कीड़े दिखे नर्सिंग स्टूडेंट्स ने हॉस्टल के 7 वीडियो सोशल मीडिया पर गुरुवार को शेयर किए हैं। जिसके बाद शाम तक यह वीडियो वायरल होने लगे। इनमें एक वीडियो में खाने में इल्ली नजर आ रही है। दूसरे में वॉटर कूलर के पानी में कीड़े तैरते दिख रहे हैं। वहीं एक वीडियो में हॉस्टल में जगह-जगह कॉकरोच घूमते नजर आ रहे हैं।

पानी का टीडीएस 703 इन्हीं वीडियो में से एक में स्टूडेंट्स पानी का टीडीएस चेक करते नजर आ रहे हैं। जिसमें छात्र कह रहे हैं कि इसका टीडीएस 703 PPM आया है। प्रबंधन कहता है कि यह पानी पीने लायक है। यह स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित 300-600 PPM और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा निर्धारित 500 PPM से कहीं अधिक है।

पानी की कोई शिकायत नहीं

जनसंपर्क अधिकारी पुरोहित ने कहा कि बीएमएचआरसी के रहवासी परिसर में वही पेयजल उपलब्ध है, जो नर्सिंग छात्रावास में दिया जाता है, लेकिन रहवासी परिसर से पानी की खराबी को लेकर कोई शिकायत नहीं आई है। छात्र-छात्राओं की सुविधा को देखते हुए नर्सिंग छात्रावास में एक आरओ प्यूरिफायर लगा दिया गया है। जल्द ही तीन और आरओ वॉटर प्यूरिफायर लगा दिए जाएंगे। साफ-सफाई की व्यवस्था के लिए एक नई चेकलिस्ट बनाई गई है।

भोजन की व्यवस्था को छात्रों के अनुसार बेहतर बनाने के लिए उन्हें कई विकल्प सुझाए गए हैं, जिनमें से एक विकल्प कोऑपरेटिव सिस्टम के जरिए मेस चलाना है। विद्यार्थियों को इंडियन नर्सिंग काउंसिल की गाइडलाइन के अनुसार छुट्टी के नियमों के बारे में अच्छी तरह से अवगत करा दिया गया है।

अधिकारी बोले- वायरल वीडियो पुराने जनसंपर्क अधिकारी पुरोहित ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो में किए जा रहे दावे गलत हैं। यह वीडियो पुराने हैं, अब पूरी व्यवस्था बेहतर हो गई है। सोशल मीडिया पर कुछ भ्रामक वीडियो संस्थान की छवि प्रभावित करने के लिए प्रसारित किए गए हैं।

पानी और भोजन की गुणवत्ता बहुत खराब

मामले में एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि छात्रों ने खुद टीडीएस मीटर से हॉस्टल के पानी की जांच की, जिसमें 703 PPM का स्तर निकला। इस स्तर का पानी स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है, फिर भी छात्र-छात्राओं को यही दूषित पानी पीने के लिए मजबूर किया जा रहा है। एक छात्रा की मौत और लगातार शिकायतों के बावजूद न तो भोजन की गुणवत्ता सुधारी गई और न ही पानी को शुद्ध किया गया। उल्टा छात्र-छात्राओं को धमकाया जा रहा है।

प्रबंधन- छात्राओं की पीलिया और एनीमिया जांच करा रहे बीएमएचआरसी के जनसंपर्क अधिकारी रितेश पुरोहित ने कहा कि विद्यार्थी के बेहतर स्वास्थ्य के लिए हर आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराने के लिए संस्थान प्रतिबद्ध है।

पीलिया और एनीमिया जैसी बीमारियों की पहचान के लिए बीते दो दिन में नर्सिंग कॉलेज की सभी छात्राओं की जांच कराई गई है। पूर्व में भी विद्यार्थियों की जांच कराई जाती रही है। सभी छात्र-छात्राओं को निशुल्क उपचार दिया जाता है। विद्यार्थियों को किसी भी तरह की परेशानी से बचाने के लिए मेडिकल रिकॉर्ड फाइल बना दी गई है।

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