संपत्ति के फर्जी और कूट-रचित दस्तावेजों के जरिए केनरा बैंक से 40 लाख रुपए का लोन लेने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है।
EOW ने बैंक अधिकारियों सहित कुल 5 आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज की है। पूरे मामले की जांच इओडब्ल्यू डीएसपी नंदिनी शर्मा ने की।
EOW के अनुसार, फरियादी केनरा बैंक क्षेत्रीय कार्यालय इंदौर के उप महाप्रबंधक आनंद शिवानंद तोतड़ ने शिकायत दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया कि चंद्रशेखर पचोरी ने मेसर्स आर. शिवम एंड कंपनी के नाम से केनरा बैंक नंदा नगर शाखा में खाता खुलवाया और मशीनरी क्रय के नाम पर 40 लाख रुपए का लोन लिया।
ऋण प्रक्रिया के दौरान राममोहन अग्रवाल को को-ऑब्लिगेंट बनाया गया और उनकी संपत्ति को गिरवी दर्शाया गया। बैंक को जो मूल्यांकन और कानूनी रिपोर्ट दी गई, उसमें प्लॉट क्रमांक 277, उषा नगर एक्सटेंशन को निर्विवाद और ऋण के लिए उपयुक्त बताया गया। इसी आधार पर 8 मई 2018 को ऋण स्वीकृत कर दिया गया।
जांच में खुलासा
EOW की जांच में सामने आया कि जिस संपत्ति को गिरवी दिखाया गया, उस पर पहले ही बहुमंजिला इमारत, फ्लैट और दुकानें बन चुकी थीं और संबंधित फ्लैट वर्ष 2009-10 में ही विक्रय हो चुका था। यानी ऋण स्वीकृति के समय को-ऑब्लिगेंट उस संपत्ति का वास्तविक मालिक नहीं था। इसके बावजूद बैंक कर्मचारियों ने भौतिक सत्यापन और ड्यू डिलिजेंस में गंभीर लापरवाही बरती।
ऋण की किश्तें जमा नहीं होने पर 1 मई 2023 को खाता एनपीए घोषित किया गया। इसके बाद पूरे मामले की परतें खुलीं।
इन पर दर्ज हुई FIR
EOW ने चंद्रशेखर पचोरी, राममोहन अग्रवाल, तत्कालीन शाखा प्रबंधक रजतिन गुप्ता, तत्कालीन क्रेडिट मैनेजर कमलेश दिवानी और एक निजी मार्केटिंग फर्म के प्रोपराइटर के खिलाफ IPC की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। मामले की विस्तृत विवेचना जारी है।
7 पॉइंट में समझिए…कैसे हुआ घोटाला
- फर्म के नाम से खाता खुला: 12 अप्रैल 2018 को मेसर्स आर. शिवम एंड कंपनी के नाम से केनरा बैंक नंदा नगर शाखा में खाता खोला गया।
- मशीनरी खरीद के नाम पर लोन आवेदन: 40 लाख रुपए के टर्म लोन के लिए आवेदन किया गया, जिसमें राममोहन अग्रवाल को को-ऑब्लिगेंट दिखाया गया।
- संपत्ति को गिरवी बताया गया: उषा नगर एक्सटेंशन स्थित प्लॉट क्रमांक 277 को बंधक संपत्ति बताया गया और उसे निर्विवाद दर्शाया गया।
- फर्जी वैल्यूएशन और लीगल रिपोर्ट: बैंक को दी गई रिपोर्ट में संपत्ति को ऋण के लिए पूरी तरह उपयुक्त बताया गया, जबकि हकीकत कुछ और थी।
- असली स्थिति छिपाई गई: जांच में सामने आया कि उसी प्लॉट पर पहले ही बहुमंजिला इमारत, फ्लैट और दुकानें बनकर बिक चुकी थीं।
- बैंक स्तर पर लापरवाही : भौतिक सत्यापन, को-ऑब्लिगेंट की पात्रता और दस्तावेजों की जांच ठीक से नहीं की गई।
- किश्तें रुकीं, खाता NPA बना: लोन की किस्तें जमा नहीं हुईं, 1 मई 2023 को खाता NPA घोषित हुआ, तब जाकर पूरा घोटाला सामने आया।




