- कीमत: ₹200 में उपलब्ध है नशा।
- दूरी: थाना कोलार से मात्र 100 मीटर।
- ग्राहक बनकर पहुंचे रिपोर्टर को आसानी से मिला गांजा।
- सवाल: क्या ऊपर तक पहुंच रहा है नशे की कमाई का हिस्सा?
राजधानी में नशे के सौदागरों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें अब कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं रहा। ताजा मामला जोन-4 के अंतर्गत आने वाले कोलार थाने का है, जहाँ पुलिस की नाक के नीचे नशे का काला कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। न्यूज़ क्राइम फाइल द्वारा किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन ने पुलिसिया गश्त और दावों की पोल खोलकर रख दी है।
₹200 में मिल रही मौत की पुड़िया
स्टिंग ऑपरेशन के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि थाने से मात्र 100 मीटर की दूरी पर गांजा तस्कर सक्रिय हैं। संवाददाता ने जब ग्राहक बनकर इन तस्करों से संपर्क किया, तो बिना किसी डर के ₹200 में गांजे की खेप थमा दी गई। यह पूरी प्रक्रिया इतनी सहजता से हुई, जैसे यहाँ पुलिस का कोई अस्तित्व ही न हो।
पुलिस से साठगांठ के लग रहे आरोप
स्थानीय सूत्रों और घटनाक्रम को देखकर अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह सब पुलिस की मिलीभगत से हो रहा है? चर्चा है कि क्राइम ब्रांच से लेकर स्थानीय थाने के कुछ कर्मियों के संरक्षण में यह अवैध धंधा चल रहा है। अगर 100 मीटर की दूरी पर हो रहे अपराध की खबर पुलिस को नहीं है, तो यह उनके काम पर सवाल खड़े करता है। और यदि खबर है, तो चुप्पी और भी खतरनाक है।
भोपाल के पोर्श इलाकों में आता है थाना कोलार
रिहायशी इलाका होने के कारण स्थानीय निवासियों में डर और नाराजगी है। लोगों का कहना है कि नशे के इस कारोबार के कारण क्षेत्र में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे महिलाओं और बच्चों का निकलना दूभर हो गया है।
युवा पीढ़ी परमंडराता खतरा
कोलार क्षेत्र में शिक्षण संस्थानों और रिहायशी इलाकों की भरमार है। थाने के इतने करीब गांजे की उपलब्धता स्थानीय युवाओं को नशे की गर्त में धकेल रही है। अगर रक्षक ही भक्षक के साथ खड़े नजर आएंगे, तो राजधानी की सुरक्षा किसके भरोसे है?
अहम बात
क्या कोलार पुलिस को सच में इस अवैध धंधे की खबर नहीं है, या फिर महीने की सेटिंग ने खाकी की आंखों पर पट्टी बांध दी है?





