भोपाल | राजधानी के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले हमीदिया अस्पताल में शनिवार सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई, जब बेखौफ बदमाशों ने इमरजेंसी गेट के बाहर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। पुरानी रंजिश के चलते हुए इस हमले में हिस्ट्रीशीटर लल्लू रईस और उसके बेटे को निशाना बनाया गया। घटना के समय अस्पताल में मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

चश्मदीद की जुबानी: ‘डेढ़ मिनट का तांडव’
उज्जैन से आए प्रत्यक्षदर्शी हेमराज ने बताया कि सुबह करीब 6:30 बजे एक एक्टिवा पर तीन युवक आए। दो युवक चाकू और पिस्टल लेकर नीचे उतरे और वहां खड़े व्यक्ति पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। हेमराज के मुताबिक, फायरिंग के वक्त पुलिसकर्मी इमरजेंसी वार्ड के अंदर ही थे, लेकिन कोई भी बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सका। आरोपी महज डेढ़-दो मिनट में वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए।

पुरानी रंजिश और वर्चस्व की जंग
पुलिस के अनुसार, यह हमला शहर के कुख्यात बदमाश लल्लू रईस और शादाब कुरैशी उर्फ गेट के गैंग के बीच चल रही पुरानी दुश्मनी का नतीजा है।
- वजह: दो साल पहले लल्लू के बेटे इमरान ने शादाब के भाई पर जानलेवा हमला किया था।
- बदला: शनिवार को उसी हमले का बदला लेने के लिए लल्लू और उसके बेटे पर फायरिंग की गई।
- विवाद: लल्लू रईस का दावा है कि वह आरोपियों के जुए-सट्टे के कारोबार का विरोध करता है, इसलिए उसे निशाना बनाया जा रहा है।

पुलिस का पक्ष
कोहेफिजा थाना प्रभारी केजी शुक्ला का कहना है कि अस्पताल की आंतरिक सुरक्षा का जिम्मा गार्ड्स का होता है, जबकि पुलिस बाहर गश्त करती है। फिलहाल एफआईआर दर्ज कर ली गई है और क्राइम ब्रांच समेत पुलिस की कई टीमें आरोपियों की तलाश में जुटी हैं।




