भोपाल/जबलपुर। मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री राकेश सिंह और आईएएस अधिकारी अरविंद शाह के बीच का विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है। जबलपुर स्मार्ट सिटी के सीईओ अरविंद शाह ने मंत्री पर बंगले पर बुलाकर अपमानित करने और गंभीर धमकियां देने के आरोप लगाए हैं, जिसके बाद आईएएस एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री के सामने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
विवाद की जड़: अनुशासन का डंडा या सियासत?
मामले की शुरुआत तब हुई जब 17 मार्च को पदभार संभालने के बाद आईएएस अरविंद शाह ने कार्यालय में सख्ती बरती। औचक निरीक्षण के दौरान 6 कर्मचारी अनुपस्थित मिले, जिनमें दिलप्रीत कौर भल्ला भी शामिल थीं। संतोषजनक जवाब न मिलने पर अधिकारी ने उनका वेतन रोक दिया और 22 अप्रैल को उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया।
बताया जा रहा है कि इसी कार्रवाई से नाराज होकर मंत्री राकेश सिंह ने अधिकारी को अपने आवास पर तलब किया। आरोप है कि जब शाह गुलदस्ता लेकर मंत्री के पास पहुंचे, तो वहां करीब 30 मिनट तक उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। अधिकारी का दावा है कि उन्हें ‘सिंगरौली तक परेड कराने’ और ‘जान से मारने’ जैसी धमकियां दी गईं।
विपक्षी तर्क: महिला कर्मचारी से दुर्व्यवहार का आरोप
दूसरी ओर, मंत्री समर्थकों और गुरुद्वारा प्रबंधन का पक्ष कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। उनका आरोप है कि आईएएस अधिकारी ने महिला कर्मचारी दिलप्रीत कौर के साथ दुर्व्यवहार किया था। चर्चा यह भी है कि स्थानीय स्तर पर अधिकारी से माफी मंगवाई गई, हालांकि अरविंद शाह ने किसी भी प्रकार की माफी मांगने की बात से साफ इनकार किया है।
एक्शन में आईएएस एसोसिएशन
एमपी आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष मनु श्रीवास्तव ने इस घटना को बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने कहा:
“प्रदेश में अधिकारियों के साथ इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे स्वतंत्र रूप से काम करना मुश्किल हो रहा है। हमने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया है।”
अधिकारी की पत्नी ने भी एसोसिएशन के पदाधिकारियों से मिलकर अपनी चिंता साझा की है। फिलहाल, यह मामला अब सिर्फ एक व्यक्तिगत विवाद न रहकर ‘सत्ता बनाम प्रशासन’ की लड़ाई बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।



