इंदौर। शहर के एक बड़े शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान को हनीट्रैप में फंसाकर 1 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगने वाले एक हाईप्रोफाइल गैंग का क्राइम ब्रांच ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने 2019 के चर्चित हनीट्रैप कांड की मुख्य आरोपी श्वेता विजय जैन, महिला तस्कर अलका दीक्षित, उसके बेटे जयदीप, प्रॉपर्टी कारोबारी लाखन चौधरी और इंटेलिजेंस के हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा को हिरासत में लिया है।
मुख्य बिंदु:
- मास्टरमाइंड: पुरानी हनीट्रैप आरोपी श्वेता विजय जैन फिर गिरफ्तार।
- पुलिस की संलिप्तता: खुफिया विभाग का हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा दे रहा था ब्लैकमेलिंग की सलाह।
- आधी रात को एक्शन: 40 जवानों की 7 टीमों ने इंदौर, पीथमपुर और भोपाल में एक साथ मारा छापा।

बिजनेस पार्टनरशिप के नाम पर बुना जाल
पीड़ित कारोबारी हितेंद्र सिंह के मुताबिक, आपराधिक रिकॉर्ड वाली अलका दीक्षित ने उन्हें लाखन चौधरी से मिलवाया था। लाखन ने प्रॉपर्टी बिजनेस में 50% की पार्टनरशिप का दबाव बनाया। इंकार करने पर आरोपियों ने कारोबारी के कुछ निजी फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी दी। हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने सुपर कॉरिडोर पर कारोबारी को घेरकर मारपीट की और ₹1 करोड़ नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी।
खाकी भी दागदार: हेड कॉन्स्टेबल ही था ‘सलाहकार’
इस पूरे खेल में पुलिस की भूमिका ने सबको चौंका दिया है। जांच में सामने आया कि इंटेलिजेंस ब्रांच में तैनात हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा लगातार अलका दीक्षित के संपर्क में था। कारोबारी के अश्लील वीडियो कॉन्स्टेबल के पास भी मिले हैं, और उसी ने अलका को कारोबारी को डराने-धमकाने की पट्टी पढ़ाई थी। पुलिस ने कॉन्स्टेबल के सरकारी आवास पर दबिश देकर उसे दबोचा और उसका लैपटॉप-मोबाइल जब्त कर लिया है।
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस गैंग ने और कितने सफेदपोशों को अपना शिकार बनाया है। आरोपियों से पूछताछ जारी है।




