भोपाल:कोलार इलाके के कृष्णा कॉम्प्लेक्स (गणपति एन्क्लेव) में रहने वाले बुजुर्ग दंपती को साइबर ठगों ने 3 महीने (96 दिन) तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर 22 लाख रुपए ठग लिए। ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी, चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर और सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी थी।
कैसे हुई ठगी?
- फर्जी केस का डर: 19 मई को आंध्र प्रदेश से लौटे दंपती (सुवर्णा लक्ष्मी और नरसिम्हा राव) को फोन आया कि उनके नाम पर गिरफ्तारी वारंट है और उनका खाता मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।
- वीडियो कॉल पर निगरानी: ठगों ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए दंपती को लगातार निगरानी में रखा और घर से बाहर जाने या किसी से बात करने पर रोक लगा दी।
- 22 लाख रुपए की वसूली: डर के कारण दंपती ने जेवर गिरवी रखकर 22 लाख रुपए ठगों के बताए 5 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।
ऐसे हुआ खुलासा और पुलिस कार्रवाई
23 अगस्त तक वीडियो कॉल के जरिए प्रताड़ना जारी रही। जब दंपती को संदेह हुआ और उन्होंने पड़ताल की, तो पता चला कि सुप्रीम कोर्ट के नाम पर दिया गया आदेश फर्जी है। इसके बाद उन्होंने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। 27 अगस्त को FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस सातों व्हाट्सएप नंबरों और बैंक खातों की जांच कर रही है।
जरूरी सलाह: पुलिस या सुप्रीम कोर्ट कभी भी वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट या पैसों की मांग नहीं करते हैं। ऐसा कॉल आने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन (1930) पर संपर्क करें।




