इंदौर | डिजिटल अरेस्ट के नाम पर देशभर में जाल बिछाने वाले गुजरात के शातिर गैंग के खिलाफ इंदौर क्राइम ब्रांच को एक और बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने मामले में फरार चल रहे आरोपी पीयूष परमार को सूरत (गुजरात) से गिरफ्तार किया है। यह गैंग खुद को पुलिस और CBI अधिकारी बताकर मासूम लोगों को अपना शिकार बनाता था।
केस डायरी: कैसे बुना ठगी का जाल?
शहर के एक 71 वर्षीय सेवानिवृत्त बुजुर्ग ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई थी। ठगी की पूरी पटकथा किसी फिल्म की तरह तैयार की गई थी:
- व्हाट्सएप कॉल से शुरुआत: 3 सितंबर 2024 को बुजुर्ग के पास एक कॉल आया। आरोपी ने खुद को बांदा पुलिस स्टेशन का अधिकारी बताकर डराया कि उनके नाम पर मुंबई के केनरा बैंक से 2.60 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ है।
- CBI का डर और फर्जी दस्तावेज: आरोपियों ने बुजुर्ग को विश्वास में लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश और अन्य कानूनी दस्तावेज भेजे। गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें ‘आकाश कुलकर्णी’ नाम के फर्जी CBI अधिकारी से कॉन्फ्रेंस कॉल पर बात करवाई गई।
- 40.70 लाख की चपत: जांच के नाम पर बुजुर्ग पर दबाव बनाया गया कि वे अपनी सारी जमा पूंजी और FD तुड़वाकर ‘RBI के सुरक्षित खाते’ में जमा करें। डर के मारे बुजुर्ग ने कुल 40 लाख 70 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
क्राइम ब्रांच की कार्रवाई: अब तक तीन गिरफ्तार
एडिशनल डीसीपी (क्राइम) राजेश दंडोतिया ने बताया कि तकनीकी विश्लेषण और मुखबिर की सूचना पर टीम ने दबिश देकर पीयूष परमार को पकड़ा है। पूछताछ में सामने आया है कि पीयूष इस गैंग को ठगी की रकम खपाने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराता था। इस मामले में गुजरात के ही हिम्मत भाई देवानी और अतुल गिरी गोस्वामी को पहले ही जेल भेजा जा चुका है।
सावधान रहें: पुलिस की अपील
”कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस व्हाट्सएप कॉल के जरिए किसी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती और न ही जांच के नाम पर पैसे की मांग करती है। ऐसे कॉल आने पर तुरंत नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें।”
— राजेश दंडोतिया, एडिशनल डीसीपी, क्राइम ब्रांच इंदौर




