भोपाल | मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आज स्वास्थ्य सेवाओं की ‘रीढ़’ कहे जाने वाले आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। जेपी अस्पताल परिसर में प्रदेशभर से जुटे हजारों कर्मचारियों ने नियमितीकरण सहित 9 सूत्रीय मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। हालात को देखते हुए प्रशासन ने पूरे अस्पताल परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया है।
प्रमुख बिंदु: आंदोलन की बड़ी बातें
- न्याय यात्रा का ऐलान: प्रदर्शनकारी कर्मचारी जेपी अस्पताल से सीएम हाउस तक ‘न्याय यात्रा’ निकालने पर अड़े हैं।
- भारी पुलिस बल: पुलिस ने बैरिकेडिंग कर अस्पताल के सभी रास्ते बंद कर दिए हैं ताकि प्रदर्शनकारी बाहर न निकल सकें।
- 30 हजार कर्मचारी: प्रदेश के अस्पतालों में कार्यरत करीब 30 हजार आउटसोर्स कर्मचारी इस आंदोलन से जुड़े हैं।
- स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित: सामूहिक अवकाश के चलते जिला अस्पतालों से लेकर संजीवनी क्लिनिक तक व्यवस्थाएं चरमरा सकती हैं।
क्यों बढ़ा कर्मचारियों का आक्रोश?
मप्र संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर आए इन कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से 12-14 घंटे काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो उचित वेतन मिल रहा है और न ही भविष्य की सुरक्षा।
”हम दो दिन से काली पट्टी बांधकर विरोध कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने हमारी सुध नहीं ली। अब यह लड़ाई सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचेगी।”
— सुरेंद्र सिंह कौरव, प्रदेश अध्यक्ष (स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारी महासंघ)

प्रमुख मांगें जिन पर अड़ा है संघ
कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक ठोस निर्णय नहीं होता, वे पीछे नहीं हटेंगे। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- नियमितीकरण: खाली पदों पर सीधे समायोजन या संविदा में विलय।
- वेतन वृद्धि: न्यूनतम वेतन ₹21,000 निर्धारित किया जाए और 11 महीने का एरियर मिले।
- सीधा भुगतान: निजी एजेंसियों को हटाकर वेतन सीधे बैंक खातों में आए।
- अन्य लाभ: 50% आरक्षण (नियमित भर्ती में), स्वास्थ्य बीमा और ग्रेच्युटी की सुविधा।
अस्पतालों में बढ़ सकती है मुश्किल
सफाई, सुरक्षा और कुपोषित बच्चों की देखरेख जैसे अहम कामों में लगे इन कर्मचारियों की हड़ताल से मरीजों की मुश्किलें बढ़ना तय है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि आज मांगों पर विचार नहीं हुआ, तो यह हड़ताल अनिश्चितकालीन रूप ले सकती है।



