भोपाल। राजधानी के नरेला विधानसभा क्षेत्र स्थित बिस्मिल्लाह कॉलोनी (ऐशबाग) की मस्जिद गरीब नवाज में शुक्रवार देर रात ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैयद अली खामनेई की याद में ‘जलसा-ए-शहादत’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जिसे देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा।
विरोध और नारेबाजी
कार्यक्रम के दौरान माहौल उस समय गर्मा गया जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टर जमीन पर रखकर पैरों से कुचले। इस दौरान सभा में मौजूद लोगों ने ‘इजराइल मुर्दाबाद’ और ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे लगाए।
तालीम और एकता पर जोर
मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना रजी-उल-हसन हैदरी ने शिक्षा (तालीम) के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा:
”दुनिया की सियासत और तकनीक में आज वही कौम आगे है जिसने तालीम को प्राथमिकता दी। मुसलमानों को भी तरक्की के लिए शिक्षा के मैदान में आगे आना होगा।”
वहीं, सैयद अजहर हुसैन रिजवी ने मुस्लिम समुदाय से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेदों को भुलाकर एक होना वक्त की जरूरत है, क्योंकि ‘बेइत्तहादी’ (अनेकता) के कारण ही दुनिया भर में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है।
प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी
AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष मोहसिन अली खान ने भी सभा को संबोधित किया और सैयद अली खामनेई को जालिम ताकतों के खिलाफ आवाज उठाने वाली शख्सियत बताया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनसमूह ने उन्हें खिराज-ए-अकीदत (श्रद्धांजलि) पेश की।



