भोपाल। मक्का-मदीना में हाजियों के ठहरने की ऐतिहासिक व्यवस्था ‘रुबात’ को लेकर राजधानी में आक्रोश फूट पड़ा है। शुक्रवार को मुस्लिम समाज के लोगों और महिलाओं ने औकाफ-ए-शाही कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने जिम्मेदारी निभाने में नाकाम अधिकारियों को चूड़ियाँ दिखाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
क्या है पूरा विवाद?
नवाबी दौर में भोपाल की बेगमों ने मक्का और मदीना में भोपाल, सीहोर और रायसेन के जायरीन के लिए मुफ्त ठहरने हेतु ‘रुबात’ (धर्मशालाएं) बनवाई थीं। आरोप है कि मदीना की रुबात 6 साल से बंद है और इस साल मक्का की रुबात में भी हाजियों को जगह नहीं मिल रही है।
हाजियों की जेब पर भारी बोझ
ऑल तंजीम को-ऑर्डिनेशन कमेटी के अनुसार, रुबात सुविधा न मिलने के कारण करीब 1000 हाजियों पर 4 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। मक्का में ठहरने के लिए प्रति हाजी 75 हजार और मदीना के लिए 25 हजार रुपये एक्स्ट्रा देने पड़ रहे हैं।
कमेटी की प्रमुख मांगें:
- मक्का रुबात के लिए 210 हाजियों का तुरंत ‘ड्रॉ’ निकाला जाए।
- सुविधा न मिलने पर अतिरिक्त खर्च औकाफ-ए-शाही खुद वहन करे।
- रुबात की बहाली के लिए प्रशासन ठोस कदम उठाए।
प्रशासन का पक्ष:
औकाफ-ए-शाही के प्रशासनिक प्रबंधक फारूक किबरिया ने कहा कि सऊदी सरकार की प्रक्रियाओं में देरी के कारण दिक्कत आई है। उच्च स्तर पर प्रयास जारी हैं और जल्द समाधान निकाला जाएगा। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और उग्र होगा। गौरतलब है कि 18 अप्रैल को हज के लिए पहली फ्लाइट रवाना होनी है।




