भोपाल की क्राइम ब्रांच ने ड्रग्स तस्करों के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। आरोपी लड़कियों के माध्यम से युवाओं को ड्रग्स सप्लाई करने का काम करते हैं। युवतियों को गिरोह में शामिल करने के लिए उन्हें ड्रग की लत लगाते थे। लत लगाने के लिए जिम आने वाली लड़कियों को वेट लॉस की दवा के नाम पर ड्र्रग के डोज दिए जाते थे।
लत लग जाने के बाद युवतियों तस्कर बनाया जाता था। इस काम के एवज में उन्हें फ्री में ड्रग दिया जाता था। गिरोह के निशाने पर कॉलेज, पब और लाउंज हुआ करते थे। पुलिस ने गिरोह के सदस्य सैफुद्दीन और आशू उर्फ शाहरुख को गिरफ्तार कर लिया है। तमाम खुलासे दोनों आरोपियों ने पूछताछ में किए हैं। आरोपियों ने आधा दर्जन से अधिक जिम और लाउंज के नाम पुलिस को बताए हैं। जहां उनके सबसे अधिक ग्राहक हुआ करते हैं।
एडिशनल डीसीपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि शुक्रवार रात सब्जी मंडी टीन शेड के पास गोविन्दपुरा में दो संदेही युवकों के स्कूटी सहित खड़े होकर किसी का इंतजार करने की सूचना मिली थी। मुखबिर ने बताया कि युवक एमडी ड्रग खपाने की बात फोन पर कर रहे हैं। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों युवकों को हिरासत में लिया। आरोपियों की पहचान सैफुद्दीन पिता रफीकउद्दीन (28) निवासी 9/10 गली नंबर 02 नूर प्रेस के पास भोईपुरा बुधवारा और आशू उर्फ शाहरूख पिता नजमुल हसन (28) साल निवासी बाग फरत अफजा गली नं.06 ऐशबाग के रूप में की गई।
तस्करी के लिए इस्तेमाल की स्कूटी भी जब्त
आरोपियों के कब्जे से स्कूटी नंबर MP04-ZS-3785 को जब्त किया गया है। दोनों की तलाशी लेने पर पैंट की जेब से सफेद रंग की पन्नी में पाउडर जैसा पदार्थ मिला और एक मोबाइल फोन मिला। उक्त मादक पदार्थ के संबंध में पूछने पर उसके द्वारा एमडी पाउडर होना बताया। मादक पदार्थ एमडी पाउडर का कुल वजन 15.14. ग्राम पाया गया। जिसकी कीमत करीब 3 लाख रुपए है।
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि कुछ युवतियों को उन्होंने ड्रग्स की लत लगाई है। इन लड़कियों से उन्होंने कई बार ड्रग्स ग्राहकों तक पहुंचाया है। इससे पुलिस से भी बचते थे और माल भी आसानी से डिलीवर हो जाता था।
नशे के आदि युवक-युवतियों को रिहैब सेंटर भेजा
एडिशनल डीसीपी के मुताबिक आरोपियों ने एक दर्जन से अधिक ग्राहकों के नाम बताए हैं। इनमें से कुछ युवक और युवतियों को चिह्नित किया गया है। उन्हें इलाज के लिए रिहेब सेंटर में भर्ती कराया गया है। आरोपियों ने कम समय में ड्रग तस्करी कर लाखों रुपए कमाने की बात भी स्वीकार की है। अवैध कमाई को आरोपी अय्याशियों में बर्बाद किया करते थे। गिरोह के अन्य सदस्यों के संबंध में पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है।




