Thursday, October 1, 2026
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भोपाल में ‘डॉग बाइट’ का आतंक: 5 साल में फूंके 8.5 करोड़, फिर भी हर रोज 81 लोग हो रहे शिकार

राजधानी में आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि सड़कों पर पैदल चलना दूभर हो गया है। शहर में हर रोज औसतन 81 लोग डॉग बाइट (कुत्तों के काटने) का शिकार हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि नगर निगम पिछले 5 साल में कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन पर करीब 8.56 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है, लेकिन जमीन पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा।

​जेपी और हमीदिया अस्पताल में रोज मासूम बच्चे और बुजुर्ग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। नगर निगम को हर दिन कुत्तों के आतंक से जुड़ी करीब 15 शिकायतें मिल रही हैं।

​कोर्ट के आदेश बेअसर, एक भी स्थायी शेल्टर नहीं

​सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के सख्त निर्देश दिए हैं, लेकिन भोपाल में इसका पालन होता नहीं दिख रहा। शहर में करीब 1.20 लाख आवारा कुत्ते हैं, लेकिन नगर निगम के पास इन्हें रखने के लिए एक भी स्थायी डॉग शेल्टर नहीं है। निगम के पास फिलहाल अरवलिया, आदमपुर छावनी और कजलीखेड़ा में जो तीन एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर हैं, उनकी कुल क्षमता महज 600 कुत्तों की है और वे केवल नसबंदी के लिए हैं।

​इन इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा

​रात के समय इन क्षेत्रों में कुत्तों के बड़े-बड़े झुंड डेरा जमाए रहते हैं:

  • ​अशोका गार्डन, अयोध्या बायपास और पिपलानी
  • ​कोहेफिजा, शाहजहांनाबाद और करोंद
  • ​मीनाल रेसीडेंसी, पटेल नगर और छोला
  • ​बैरागढ़, लालघाटी-हलालपुर रोड, रेलवे स्टेशन, आईएसबीटी और न्यू मार्केट

​इंदौर और पूरे एमपी का भी बुरा हाल

​कुत्तों के आतंक के मामले में इंदौर की स्थिति और भी भयावह है। वहां अप्रैल महीने में हर दिन औसतन 146 लोग डॉग बाइट का शिकार हुए। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश में 10.09 लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं, जिनमें से 6 लाख अकेले इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में हैं। केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 से जनवरी 2025 तक प्रदेश में करीब 3.39 लाख मामले सामने आ चुके हैं और इस दौरान रेबीज से 9 लोगों की मौत भी हुई है।

​क्यों आक्रामक हो रहे हैं कुत्ते?

​पशु चिकित्सक एसआर नागर के अनुसार, गर्मी के मौसम में कुत्तों का व्यवहार अधिक आक्रामक हो जाता है। कुत्तों के शरीर में इंसानों की तरह पसीना निकालने वाले छिद्र (स्वेट ग्लैंड) नहीं होते, जिससे वे अपने शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं कर पाते। अप्रैल से जून के बीच भारी गर्मी के कारण उनमें चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। ऐसे में भोजन-पानी की कमी होने पर वे राहगीरों पर हमला कर देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कुत्तों को पर्याप्त पानी और छाया मिले, तो उनका व्यवहार शांत रह सकता है।

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