Monday, February 23, 2026
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बालाघाट में बाघ शिकार मामले की एनटीसीए से शिकायत

प्रदेश के बालाघाट जिले में एक हफ्ते पहले बाघ के शिकार और इसमें वन कर्मचारियों एवं अधिकारियों की मिलीभगत का मामला अब एनटीसीए तक पहुंच गया है। मामले की हाईलेवल जांच के साथ डीएफओ की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है। वन बल प्रमुख से कहा गया है कि सही जांच हुई तो शिकार के और भी मामले सामने आ सकते हैं।

एनटीसीए (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण) और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) को शिकायत करते हुए वाइल्ड लाइफ सिविल राइट्स एक्टिविस्ट अजय दुबे ने कहा है कि कान्हा- पेंच कॉरिडोर में स्थित बालाघाट साउथ के सोनवानी वन क्षेत्र के कंपार्टमेंट 443 में बाघ के शिकार के लिए अज्ञात दोषियों के साथ मृत बाघ के शरीर को नष्ट करने में वन कर्मियों का शामिल होना दुर्भाग्यपूर्ण है। बता दें कि इस मामले में विजय अम्बाड़े पीसीसीएफ (HoFF) को 2 अगस्त 2025 की दोपहर में पूरे मामले की जानकारी देने के बाद इस घटनाक्रम का खुलासा हुआ।

27 जुलाई से शिकार की सूचना वायरल, अफसरों को पता नहीं

दुबे ने कहा कि प्रस्तावित सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व में 60 से अधिक बाघों की उपस्थिति है लेकिन बालाघाट साउथ डिवीजन के डीएफओ अधर गुप्ता न ऑफिस में रहते हैं न फील्ड पर भ्रमण करते हैं। बाघ के शिकार की सूचना स्थानीय लोगों में 27 जुलाई 2025 से वायरल हो गई थी, लेकिन सीसीएफ से वन रक्षक तक के वन अफसर, कर्मचारी निष्क्रिय रहे। वर्तमान डीएफओ की ऑफिस में उपस्थिति न होने से ऑनलाइन TP बड़ी संख्या में लंबित हैं और बांस परिवहन करने वाले ढेरों वाहन बालाघाट में खड़े हैं।

वनकर्मियों पर कंट्रोल नहीं, बाघ के शिकार और नष्ट करने में रहे शामिल

शिकायत में यह भी कहा गया है कि डीएफओ अधर गुप्ता द्वारा कान्हा पेंच कॉरिडोर में स्थित सोनवानी क्षेत्र के बाघों की सुरक्षा के लिए खुफिया तंत्र विकसित नहीं किया और वन कर्मियों पर नियंत्रण नहीं रखा जिसके कारण वन कर्मचारी बाघ के शिकार और नष्ट करने में शामिल रहे। इसलिए लंबे समय से पदस्थ लोकल स्टाफ को हटाकर साफ सुथरी छवि वाले अफसरों की टीम गठित कर उच्च स्तर की जांच कराएं जिससे पूर्व के बाघों के शिकार और गायब होने के प्रकरणों की असलियत पता चल सके।

कोर्ट में पेश होने के बाद फरार हो गए डिप्टी रेंजर और वनरक्षक

इस मामले में कुछ माह पूर्व निकटवर्ती राज्य महाराष्ट्र में पकड़ाए पारदी गिरोह की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। जिस बाघ के शिकार का मामला हाल ही में चर्चा में आया है उसके शिकार के मामले में निलम्बित आरोपी डिप्टी रेंजर और वनरक्षक बालाघाट साउथ डिवीजन के डीएफओ की जानकारी में 4 अगस्त 2025 को स्थानीय कोर्ट में पेशी कर फरार हुए जो गंभीर लापरवाही और मिलीभगत का प्रमाण है। इन आरोपियों के खिलाफ भी वन्य प्राणी अपराध प्रकरण दर्ज नहीं हुआ।

बाघ के शिकार में डीएफओ, एसडीओ, रेंजर के विरुद्ध कार्यवाही न करने और आदिवासी समाज के 6 चौकीदारों को आरोपी बनाकर गिरफ्तार करने से स्थानीय लोगों में आक्रोश है। इसलिए निष्पक्ष जांच कराएं जिससे बाघों और इंसानों में संघर्ष न हो। दुबे ने मध्यप्रदेश के वन्य प्राणी मुख्यालय की समीक्षा करने को कहा है जिससे फील्ड में बेहतर कार्यप्रणाली के प्रतिबद्धता का संदेश जाए।

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