भोपाल | 25 फरवरी, 2026
राजधानी की विशेष अदालत ने पद का दुरुपयोग और षडयंत्र रचकर भ्रष्टाचार करने वाले जिला सहकारी एवं ग्रामीण विकास बैंक के तत्कालीन अधिकारियों और एक महिला खरीदार को कड़ी सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह की अदालत ने धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चार आरोपियों को 3-3 साल के सश्रम कारावास की सजा से दंडित किया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला साल 2000 का है, जब हुजूर तहसील के ग्राम महाबड़िया के एक किसान मोहम्मद फिरोज ने अपनी 5 एकड़ जमीन बैंक में बंधक रखकर 20 हजार रुपये का लोन लिया था। बैंक के अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर किसान की बेशकीमती जमीन को महज 70 हजार रुपये में श्रीमती भावना सिन्हा को नीलाम कर दिया। यह नीलामी न केवल बाजार मूल्य से काफी कम थी, बल्कि इसके लिए फर्जी दस्तावेज भी तैयार किए गए थे।
इन आरोपियों को मिली सजा:
अदालत ने निम्नलिखित आरोपियों को दोषी करार देते हुए जेल और अर्थदंड की सजा सुनाई:
- हरिहर प्रसाद मिश्रा (तत्कालीन विक्रय अधिकारी)
- आर. एस. गर्ग (पुष्टिकर्ता अधिकारी)
- हुकुमचंद सिंघाई (तत्कालीन महाप्रबंधक)
- श्रीमती भावना सिन्हा (जमीन खरीदने वाली महिला)
लोक अभियोजक का पक्ष:
विशेष लोक अभियोजक श्रीमती हेमलता कुशवाहा ने बताया कि आरोपियों ने पद का दुरुपयोग करते हुए नीलामी की फर्जी नोटशीट तैयार की और वरिष्ठ कार्यालयों से इसे गलत तरीके से मंजूर कराया। लोकायुक्त पुलिस की जांच और अभियोजन द्वारा पेश किए गए ठोस सबूतों व दस्तावेजों के आधार पर माननीय न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषी पाया।
फैसला: अदालत ने स्पष्ट किया कि लोक सेवक का पद जनसेवा के लिए है, भ्रष्टाचार के जरिए निजी लाभ कमाने के लिए नहीं। सभी दोषियों पर जेल के साथ-साथ आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है।




