भोपाल | राजधानी नगर निगम में फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए के भुगतान का मामला गरमा गया है। लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने शनिवार को अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर को वित्त एवं लेखा शाखा के प्रभार से हटा दिया है। उनकी जगह अब अपर आयुक्त मुकेश शर्मा को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
10 साल का डेटा और सर्वर जब्त
लोकायुक्त पुलिस ने शुक्रवार को नगर निगम के डेटा सेंटर और कई शाखाओं में एक साथ छापेमारी की थी। टीम ने पिछले 10 साल के दस्तावेज और ‘सैप’ (SAP) सॉफ्टवेयर का डिजिटल डेटा कब्जे में लिया है। आरोप है कि बिना काम कराए ही गाड़ियों की मरम्मत, पेंटिंग और अन्य कामों के नाम पर ई-बिल बनाकर सरकारी खजाने को चपत लगाई गई।
बजट से ठीक पहले बड़ी कार्रवाई
हैरानी की बात यह है कि अगले कुछ ही दिनों में नगर निगम का बजट पेश होना है, जिसे तैयार करने की मुख्य जिम्मेदारी सेवतकर के पास ही थी।
- FIR की धाराएं: सेवतकर समेत अन्य पर भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी के तहत केस दर्ज किया गया है।
- जांच का दायरा: लोकायुक्त को नवंबर 2025 में फर्जी भुगतान की शिकायत मिली थी, जिसके बाद 9 मार्च को FIR दर्ज कर कोर्ट से सर्च वारंट लिया गया।
अपर आयुक्त की सफाई
हटाए गए अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर का कहना है कि लेखा शाखा सीधे बिल पास नहीं करती। संबंधित विभागों से वेरिफिकेशन के बाद फाइल आती है और कमिश्नर से चर्चा के बाद ही भुगतान किया जाता है। हालांकि, लोकायुक्त का मानना है कि डिजिटल डेटा की जांच में कई बड़े नाम और फर्मों के खुलासे हो सकते हैं।




