अमृत योजना के तहत बनाए गए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से शहर की टंकियों से पहली बार प्रेशर के साथ पानी आया है। इस पानी के प्रेशर के कारण कई जगह लाइनों में लीकेज हो गया है। वहीं कई स्थानों पर लोगों के घरों में मिट्टी भी पानी के साथ आई है। बुधवार-गुरुवार को पहली बार जलालपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से पानी की टंकियों को भरा गया । लेकिन इस दौरान लाइनों में भरी मिट्टी को पानी के प्रेशर से निकाला जाता है, लेकिन इसमें ऐसा कुछ नहीं किया गया। हालांकि पानी के तेज प्रेशर के कारण जो पानी की टंकी 6 घंटे में भर पाती थी वह तीन घंटे में ही भर गई। शुक्रवार को इन टंकियों से ग्वालियर विधानसभा एवं ग्वालियर पूर्व विधानसभा में पानी की सप्लाई की गई। इससे लोगों के घरों में प्रेशर से पानी आया।
अमृत योजना के तहत 320 करोड़ रुपये की लागत से 700 किलोमीटर से ज्यादा पानी की लाइनें डाली गई हैं। साथ ही वाटर ट्रीटमेंट प्लांट एवं तिघरा से जलालपुर तक पानी लाने के लिए लाइन डाली गई है। 40 पानी की टंकियों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इनमें से अधिकांश पानी की टंकियों को मोतीझील प्लांट से आई पुरानी लाइनों से भरकर संचालित किया जा रहा है। लेकिन इन टंकियों से अधिकांश इलाकों में आज भी पुरानी लाइनों से ही पानी सप्लाई हो रहा है। गुरुवार को पानी की टंकियों को भरा गया है। इन टंकियों से शुक्रवार को शहरभर में पानी की सप्लाई नए डीएमए से की गई। अमृत योजना में 12 मीटर ऊंचाई तक बिना किसी मोटर के पानी सप्लाई हो इसके इसके हिसाब पानी की लाइनाें एवं टंकियों को डिजाइन किया गया है। पुरानी पानी की टंकियों से बिछाई गई लाइनें शहर के अधिकांश क्षेत्रों में फैली हुई हैं। इसके चलते जलालपुर एवं मोतीझील के दो प्लांटों से प्रेशर से टंकियों में पानी भरा जाएगा। इसके चलते अब पूरे शहर में प्रेशर से पानी आएगा। पानी की सप्लाई प्रारंभ होते ही अनेकों स्थान पर जाइंट के ढीले होने, अथवा ज्वाइंट नहीं होने के साथ लाइनों के फटने की समस्या सामने आएगी। इन समस्याओं के निराकरण में पीएचई विभाग को करीब सात से आठ दिन का समय लगेगा। क्योंकि नई पानी की टंकियों से प्रेशर काफी तेज आने की बात कही गई है।




