भोपाल नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन को बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट की डिवीजन बैंच ने सिंगल बैंच के आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्हें कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट का दोषी माना गया था।
दरअसल, हाईकोर्ट में जस्टिस विशाल मिश्रा की बैंच ने भोपाल नगर निगम को अवैध निर्माण गिराने के मामले में दोषी ठहराया था। कोर्ट ने कहा कि नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई गाइडलाइन का पालन नहीं किया, जो कानून के राज के खिलाफ माना गया।
यह आदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने मार्लिन बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड बनाम नगर निगम भोपाल मामले में गुरुवार को दिया था। सिंगल बैंच ने आयुक्त संस्कृति जैन को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराते हुए 6 फरवरी 2026 को सजा सुनाने के लिए सुनवाई तय की थी।
भोपाल नगर निगम ने सिंगल बैंच के आदेश को चुनौती देते हुए डिवीजन बैंच में मामला उठाया। शुक्रवार को हुई सुनवाई में बैंच ने पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा और अगली सुनवाई 18 फरवरी को तय की।
केस विचाराधीन था, फिर भी तोड़फोड़ की
इससे पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा था- अवैध निर्माण को लेकर सिविल कोर्ट में केस चल रहा था। इसके बावजूद नगर निगम ने कोर्ट से अनुमति लिए बिना तोड़फोड़ कर दी।
कंपनी की दलील- कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना की तोड़फोड़
दरअसल, भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित नादिर कॉलोनी में मार्लिन बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड की संपत्ति के एक हिस्से को अवैध बताते हुए नगर निगम ने तोड़ने का नोटिस दिया था। कंपनी ने इसको सिविल कोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई पूरी हुए बिना ही नगर निगम ने इस हिस्से को ढहा दिया।
इस पर कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। इसमें कहा- नगर निगम ने 18 नवंबर 2025 को उसकी संपत्ति के फ्रंट हिस्से को बिना विधिवत प्रक्रिया अपनाए तोड़ दिया।
वहीं, नगर निगम की ओर से दलील दी गई कि निर्माण अवैध था और 7 नवंबर 2024 को दी गई अनुमति रद्द की जा चुकी थी। निगम ने यह भी कहा कि 14 मई 2025 को नोटिस जारी किया गया था और इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई।
निगम कमिश्नर ने माना- निर्माण पहले जैसा नहीं कर सकते
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान भोपाल नगर निगम की आयुक्त संस्कृति जैन खुद पेश हुईं। निगम की ओर से बिना शर्त माफी का प्रस्ताव दिया गया, लेकिन कोर्ट ने शर्त रखी कि तोड़ा गया हिस्सा पहले जैसा बना दिया जाए।
इस पर कमिश्नर संस्कृति जैन ने कहा कि तोड़े गए निर्माण को पहले जैसा नहीं किया जा सकता। इस पर कोर्ट ने कहा- अब आयुक्त को सजा के प्रश्न पर अपना पक्ष रखना होगा। 6 फरवरी को सुबह 10:30 बजे सजा पर सुनवाई की जाएगी।




