क्रमोन्नति और वेतनमान के लाभ की मांग करते हुए हाई कोर्ट में दायर एक याचिका का निराकरण करते हुए कोर्ट ने शासन से कहा कि शासकीय कर्मचारी को नियुक्ति दिनांक से 24 साल में द्वितीय और 30 साल में तीसरी क्रमोन्नति का लाभ दिया जाए। कोर्ट ने शासन से कहा है कि वह याचिकाकर्ता के प्रतिवेदन पर दो माह में निर्णय ले और निर्णय लेते वक्त 26 अप्रैल 2007 को कोर्ट द्वारा एक याचिका में सुनाए फैसले और 26 जून 2018 को जारी परिपत्र को ध्यान में रखा जाए।
याचिकाकर्ता सुरेशचंद्र बामनिया ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर क्रमोन्नति और वेतनमान का लाभ दिलाए जाने की गुहार लगाई थी। याचिकाकर्ता की तरफ से पैरवी कर रही एडवोकेट अर्चना उपाध्याय ने बताया कि कोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए शासकीय कर्मचारियों को नियुक्ति दिनांक से 24 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर द्वितीय क्रमोन्नति का लाभ और 30 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर तृतीय क्रमोन्नति का लाभ देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि मप्र शासन द्वारा 26 जून 2018 को जारी परिपत्र के अनुसार सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग 60 दिवस में याचिकाकर्ता के आवेदन को निराकृत करें।
बैकलाग पदों पर भर्ती को लेकर अजाक्स ने दिया धरना
इंदौर। मप्र अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) ने पदोन्नति में आरक्षण, नवीन पदोन्नति नियम 2017 लागू करने और एक लाख चार हजार से ज्यादा खाली पदों पर नियुक्त करने की मांग को लेकर कलेक्टोरेट चौराहे पर धरना दिया। जिलाध्यक्ष करण भगत ने बताया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में युवा बेरोजगार हैं। इसके चलते अनुसूचित जाति जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के लोगों में रोष है। राज्य सरकार ने अजाक्स की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो मार्च में पूरे प्रदेश में अनुसूचित जाति जनजाति समुदाय एकत्रित होकर महाआंदोलन करेगा। सरकार इस ओर ध्यान दे वरना आंदोलन को मजबूर होना पड़ेगा।




