Thursday, April 2, 2026
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IAS वर्मा बोले-कितनों को मारोगे, हर घर से संतोष निकलेगा

आईएएस अधिकारी और अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिकारी-कर्मचारी संघ (अजाक्स) के अध्यक्ष संतोष वर्मा का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वे कहते दिख रहे हैं- कितने संतोष वर्मा को तुम मारोगे, कितने को जलाओगे, कितने को निगल जाओगे। अब हर घर से एक संतोष वर्मा निकलेगा और जब हर घर से निकलेगा, तो आपके पास इतनी ताकत नहीं कि आप हर संतोष वर्मा को जला सको।

इस वाक्य के आगे संतोष वर्मा ने और क्या कहा, वीडियो में यह शामिल नहीं है। वीडियो कब और कहां का है, इसका पता भी नहीं चल सका है।

दैनिक भास्कर ने जब इस बारे में IAS संतोष वर्मा से पूछा तो उन्होंने कहा कि ये बात उनसे फोन पर उत्तर प्रदेश की नगीना सीट से सांसद चंद्रशेखर रावण ने कही थी। वे तो अजाक्स भवन में संघ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से इस बारे में बात कर रहे थे। वर्मा ने अपनी बात की शुरुआत इससे की थी कि भीम आर्मी के चंद्रशेखर रावण ने ये बात कही है कि कितने संतोष वर्मा को तुम मारोगे।

वर्मा ने कहा- जो वीडियो वायरल किया जा रहा है, वह आपसी बैठक का है। यह संघ की बैठक से संबंधित है। इसमें कुछ गलत नहीं कहा है। जो बयान है, वह किसी और ने कहा है इसलिए इसमें कोई गलती नहीं है।

ब्राह्मण समाज ने कहा- कार्रवाई नहीं हुई तो सड़क पर उतरेंगे

वर्मा के इस नए वीडियो के वायरल होने के बाद ब्राह्मण संगठन ने नाराजगी जाहिर की है। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के नेता पुष्पेंद्र मिश्रा ने कहा- ब्राह्मण बेटियों को लेकर अनर्गल बयान देने पर सरकार ने अब तक वर्मा के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। अगर जल्द ही उन पर एफआईआर और कार्रवाई नहीं हुई तो ब्राह्मण समाज सड़क पर उतरने पर मजबूर हो जाएगा।

मिश्रा ने कहा- वर्मा को कहां से ऊर्जा मिल रही है? उस पर नजर-ए-इनायत क्यों है? गेंद मुख्यमंत्री के पाले में है। उनसे आग्रह है कि इस मामले में जल्द कार्रवाई करें।

सरकार ने नहीं माना अजाक्स का अध्यक्ष उधर, मध्य प्रदेश सरकार ने संतोष वर्मा को अजाक्स का अध्यक्ष मानने से इनकार कर दिया है। सरकार ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में जानकारी दी है कि संघ के अध्यक्ष वर्मा नहीं, मुकेश मौर्य हैं। विधायक राजेंद्र भारती ने विधानसभा में इससे संबंधित सवाल लगाया था। 2 दिसंबर को यह जबाव सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से दिया गया।

कार्यकारिणी की वैधानिकता का निर्धारण नहीं रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसायटी ने लिखित जानकारी में यह भी बताया है कि अधिकारी-कर्मचारी संघों को मान्यता नहीं दी जाती है। मध्य प्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1973 की धारा 27 के अंतर्गत पेश जानकारी का परीक्षण करने का प्रावधान अधिनियम में न होने के कारण कार्यकारिणी की वैधानिकता का निर्धारण भी नहीं किया जाता है।

सरकार के इस जवाब पर मंत्रालयीन अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने सोशल मीडिया पर लिखा- कम से कम इतना तो हुआ कि सरकार ने आईएएस संतोष कुमार वर्मा को अजाक्स का प्रांताध्यक्ष मानना बंद कर दिया है।

मुकेश मौर्य के अध्यक्ष होने का ऐसे हुआ खुलासा

शीतकालीन सत्र में विधायक राजेंद्र भारती ने पंजीकृत कर्मचारी संघों की अपडेट जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में रजिस्ट्रार ने बताया कि अजाक्स भोपाल का पंजीयन 5 जून 1993 को हुआ है। धारा 27 के अंतर्गत 13 नवंबर 2025 को मिली जानकारी के मुताबिक अजाक्स के प्रांताध्यक्ष मुकेश मौर्य हैं।

इसके बाद यह साफ हो गया है कि रिटायर्ड आईएएस जेएन कंसोटिया द्वारा नियुक्त कराए गए आईएएस संतोष कुमार वर्मा को सरकार अजाक्स का अध्यक्ष नहीं मानती है।

वर्मा ने मौर्य को फर्जी बताया मुकेश मौर्य को शासन की ओर से अजाक्स का प्रांताध्यक्ष माने जाने पर वर्मा ने कहा- वह टोटली फ्रॉड है। उसका संघ से लेना-देना नहीं है। सबको पता है कि जेएन कंसोटिया ने 1993 में रजिस्ट्रेशन कराया है।

वर्मा ने कहा कि रजिस्ट्रार फर्म्स और सोसायटी को जांच करना चाहिए कि आखिर मुकेश मौर्य को कब अध्यक्ष बनाया गया? धारा-27 के अंतर्गत दी गई जानकारी के आधार पर यह सब तय होता है। इसकी जांच होना चाहिए।

अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन में दिया था विवादित बयान दरअसल, 23 नवंबर को भोपाल के अंबेडकर मैदान में अजाक्स का प्रांतीय अधिवेशन हुआ था। इसमें सीनियर IAS अधिकारी संतोष वर्मा को प्रांताध्यक्ष चुना गया था। इसी अधिवेशन में वर्मा ने कहा था, “एक परिवार में एक व्यक्ति को आरक्षण तब तक देना चाहिए, जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता या उससे संबंध नहीं बनता।”

बयान पर सरकार ने दिया था नोटिस ब्राह्मणों की बेटियों को लेकर विवादित बयान देने वाले आईएएस अधिकारी संतोष कुमार वर्मा को राज्य शासन ने 26 नवंबर को नोटिस जारी किया था। नोटिस में कहा गया है कि 23 नवंबर 2025 को भोपाल में हुए अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन में दिया गया बयान भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारियों से अपेक्षित आचरण के अनुरूप नहीं है। यह अनुशासनहीनता, स्वेच्छाचारिता और गंभीर कदाचरण की श्रेणी में आता है।

नोटिस में कहा गया है कि वर्मा द्वारा अखिल भारतीय सेवाएं आचरण नियम 1967 के नियमों का उल्लंघन किया गया है। इसके आधार पर वर्मा ने खुद को अखिल भारतीय सेवाएं अनुशासन तथा अपील नियम 1969 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्यवाही का भागीदार बना लिया है।

वर्मा बताएं कि ऐसे कृत्य पर उनके विरुद्ध अखिल भारतीय सेवाएं अनुशासन तथा अपील नियम 1969 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए?

सरकार ने वर्मा से 7 दिन में जवाब मांगा है। जवाब न मिलने पर एकपक्षीय कार्यवाही करने की चेतावनी भी दी गई है।

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