छिंदवाड़ा शहर के जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में आयकर विभाग द्वारा की गई स्पॉट वेरिफिकेशन की कार्रवाई में 1600 लोगों की जानकारी छिपाने का खुलासा हुआ है। इनके द्वारा 2500 करोड़ रुपए की राशि फिक्स डिपॉजिट और दस लाख रुपए से अधिक के कैश के रूप में जमा कराई गई है। इसके बाद अब जिला सहकारी केंद्रीय बैंक छिंदवाड़ा को इस मामले में चेतावनी देते हुए पूरी जानकारी आयकर विभाग को देने के लिए कहा गया है।
आयकर विभाग की टीम ने 11 सितम्बर को छिंदवाड़ा शहर के इस बैंक में सर्वे की कार्रवाई शुरू की थी, जो दो दिन तक चली थी। इसके बाद सर्वे की एनालिसिस में यह बात सामने आई है कि वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक इस बैंक में 1600 से अधिक लोगों ने और समितियों के माध्यम से मोटी रकम जमा की गई है।
आयकर अधिनियम की धारा 285 बीए के अनुसार, सहकारी बैंकों के लिए भी अन्य बैंकों की तरह यह बाध्यता है कि वित्त वर्ष के दौरान चालू खाते में 50 लाख से अधिक और बचत खाते में 10 लाख रुपए से अधिक राशि नकद जमा करने और दस लाख से अधिक के फिक्स डिपॉजिट करने वाले खातों की जानकारी आयकर विभाग को सटीक रूप में देना जरूरी है।
छिंदवाड़ा जिला सहकारी केंद्रीय बैंक ने सोसायटियों और व्यक्तिगत खातों के रूप में 1600 से अधिक खातों में जमा कराए गए, इस तरह के एमाउंट की जानकारी आयकर विभाग को साझा नहीं की थी। इन सबके जमा राशि को जोड़ने पर यह राशि 2500 करोड़ रुपए होती है।
आयकर अफसरों की नाराजगी पर जानकारी साझा करने का आश्वासन
बैंक की कार्यशैली पर आयकर विभाग की जांच टीम ने नाराजगी जताई है। इसके बाद बैंक ने आयकर विभाग के इंटेलिजेंस एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डायरेक्टर डॉ. सुधाकर एन शिंदे और उनकी टीम को आश्वस्त किया कि आने वाले समय में सभी जानकारी साझा की जाएगी।
आयकर विभाग ने सहकारी और ग्रामीण बैंकों से कहा है कि अपनी एसएफटी फाइलिंग की प्रक्रिया को गंभीरता से लेते हुए इस तरह के मामले में पूरी जानकारी दी जाए, ताकि किसी तरह की कार्रवाई के दायरे में न आने पाएं।




