Wednesday, February 11, 2026
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पति की हत्या की…फिर बीयर पीकर बारात में डांस किया

झाबुआ के नारेला गांव में 28 जनवरी को नाबालिग पत्नी ने गला घोंटकर पति की हत्या कर दी। उसने शादी के समय की पगड़ी का फंदा बनाया था। इस मामले में नया खुलासा हुआ है। वारदात के बाद आरोपी ने शादी में जाने के लिए लाश के सामने ही दुल्हन जैसा श्रृंगार किया। बीयर भी पी।

इसके बाद बारात में घोड़ी पर बैठे दूल्हे के आगे महिलाओं के साथ जमकर डांस किया। जब भतीजी ने कहा कि चाचा को जगा दो, तो बोली- वो शराब पीकर सो रहे हैं, सोने दो। जागेंगे तो मुझसे झगड़ा करेंगे। वारदात के बाद बारात में घूंघट डालकर डांस करने का वीडियो भी सामने आया है।

शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में भी गला दबाकर हत्या की पुष्टि हुई है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। इधर, परिजन ने आरोपी नाबालिग के चरित्र पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वो अकेला ऐसा नहीं कर सकती। हत्या में कोई और भी शामिल हो सकता है।

वारदात के बाद से गांव में मातम पसरा झाबुआ जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर है नारेला गांव। आबादी करीब दो हजार है। बीते तीन दिन ये यहां के लोग मोबाइल पर शादी में डांस करती 17 साल की दुल्हन के दो वीडियो खूब देख रहे हैं।

वारदात के एक दिन पहले…

तारीख- 27 जनवरी, समय- रात 9 बजे गांव में आदिवासी किसान थावरसिंह माल के बेटे बंटी की शादी थी। बारात जाने से एक दिन पहले मामेरा की रस्म पूरी करने के बाद परिवार और समाज के लोगों ने शराब पी, फिर खाना खाया। इस दावत में महिलाओं के साथ 17 साल की नाबालिग दुल्हन भी अपनी उम्र से नौ साल बड़े पति कैलाश के साथ शामिल हुई।

वो पति को प्यार से नाना भी कहती थी। उन्होंने खाना खाया। देर रात तक सबके साथ डीजे की धुन पर जमकर डांस किया।

सुबह बारात निकलना थी, तो घर के बुजुर्गों ने बच्चों से नाच गाना बंद कर सोने जाने को कहा। थोड़ी देर बाद सब अपने-अपने घर चले गए। कैलाश भी पत्नी के साथ आ गया। घर पहुंचते ही दोनों के बीच तेज आवाज में झगड़ा होने लगा।

कैलाश के भतीजे विक्रम माल कहते हैं कि चाचा-चाची दोनों में रोजाना किसी न किसी बात को लेकर बहस होती थी। हमने ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

अब दूसरे दिन…

28 जनवरी, समय– सुबह 9:30 बजे थावरसिंह के परिवार के लोग बारात में जाने की तैयारी कर रहे थे। घर के सामने घोड़ी और डीजे आ गए थे। थोड़ी देर में डीजे बजना शुरू हो गया। परिवार के लोग नाश्ते के बाद जल्दी-जल्दी तैयार होने लगते हैं।

उधर, दूसरी तरफ कैलाश के घर में खामोशी है। उसकी नाबालिग पत्नी बारात जाने के लिए मेकअप कर रही थी। इतने में चाचा कैलाश को बुलाने भतीजी आ पहुंची। उसने चाची से कहा कि चाचा को दादा बुला रहे हैं।

चाची उसे खामोश रहने का इशारा करते हुए कहती है कि तेरे चाचा ने मना किया है। वो सो रहे हैं। बारात में नहीं जाएंगे। उन्हें मत जगा नहीं, तो मुझसे झगड़ा करेंगे। चल, तू मेरी साड़ी पहनने में मदद कर दे।

भतीजी की मदद से तैयार हुई चाची नई-नवेली दुल्हन की तरह श्रृंगार कर शादी वाले घर पहुंच जाती है। वहां पहुंचते ही कैलाश की पत्नी पहले बीयर पीती है। डीजे की धुन पर डांस कर रहे परिवार की दूसरी महिलाओं के साथ वो डांस करने लगी।

28 जनवरी, सुबह- 11 बजे कैलाश की बड़ी बहन लीला ने जब उसकी पत्नी से पूछा कि नाना कहां है, तो उसने कहा कि आ रहे हैं। कुछ देर बाद, जब वो नहीं आया, तो लीला उसके घर पहुंच गईं। जब वह भाई के घर पहुंची, तो कैलाश जमीन पर कंबल ओढ़े लेटा मिला। लीला ने जगाने की कोशिश की। शरीर में हलचल नहीं होने पर उसने कंबल हटाकर छुआ, तो शरीर ठंडा हो चुका था। नब्ज भी नहीं चल रही थी।

लीला भागते हुए शादी वाले अपने चाचा के घर पहुंची। यहां कैलाश के बारे में बताया। लीला जब कैलाश के बारे में बता रही थी, उस वक्त कैलाश की नाबालिग पत्नी डांस कर रही थी। जैसे ही, उसने लीला की बात सुनी, दौड़ते हुए घर पहुंची और चीख-चीख कर रोने लगी।

करीब एक घंटे बाद पुलिस पहुंची। फोरेंसिक जांच के बाद शव पीएम के लिए भेजा गया। अगले दिन पुलिस ने हत्या के आरोप में मृतक की नाबालिग पत्नी को गिरफ्तार कर लिया।

सात महीने पहले हुई थी शादी कैलाश के भतीजे विक्रम माल कहते हैं कि काकी ऐसा अकेले कर नहीं सकती हैं। काका कैलाश अच्छे-खासे हट्टे-कट्टे थे। अगर वो अकेली होती, तो वो उन्हें ऐसे ही फेंक देते। जरूर कोई और भी इसमें शामिल है।

विक्रम कहते हैं कि पिछले साल जून के आखिरी दिनों में ही तो दोनों की शादी हुई थी। 6-7 महीने ही हुए हैं। शादी के बाद से ही झगड़े शुरू हो गए थे। दोनों गुजरात के मोरबी काम करने चले गए। वहां काकी की किसी युवक से दोस्ती हो गई।

जब काका कैलाश को इस बारे में पता चला, तो वो काकी को लेकर गांव वापस आ गए। इसके बाद काकी ने दो बार घर से भागने की कोशिश की। एक बार काकी शौच के लिए जाने की बात कह कर मोरबी चली गई थीं। हमें पता चल गया, तो उन्हें लेकर आए।

कुछ दिन बाद वह फिर घर से भाग गईं। कहीं नहीं मिली, जब आखिरी बार रेलवे स्टेशन पर रात करीब 12 बजे पहुंचे, तो वे हमें देखकर भाग गई। बमुश्किल पुलिस की मदद से पकड़कर लाए थे। इसके बाद उनके परिवार वाले भी आए। उन्होंने भी समझाया। जैसा कि बताया जा रहा है कि रील बनाने पर झगड़ा हुआ, ऐसी बात नहीं है।

मृतक कैलाश के चचेरे भाई मुकेश बताया कि रात 2 बजे तक कैलाश को देखा था। वह लोगों को खाना खिला रहा था। उसके बाद शादी का माहौल था, तो किसी ने ध्यान नहीं दिया।

कैलाश की भाभी शारदा कहती हैं कि भाई की पत्नी रात 2 बजे तक नाचती रही। सुबह भाई की लाश के सामने तैयार होकर नाचने आई, तो भी शक नहीं हुआ।

भतीजी बोली- मुझसे साड़ी पहनने में मदद ली

कैलाश के घर के दूसरे हिस्से में ही रहने वाली उनकी भतीजी बीजू कहती हैं- सुबह बारात जाने से पहले काका के घर गई थी। उस समय कैलाश काका जहां सो रहे थे, वहीं पांव के पास खड़े होकर काकी श्रृंगार कर रही थीं।

उन्होंने मुझसे साड़ी पहनने में मदद करने को कहा। इसके बाद हम शादी वाले घर में आ गए।

बहन बोली- मैंने छुआ तो भाई अकड़ा हुआ था कैलाश की बड़ी बहन लीला कहती हैं कि भाई कड़क मिजाज के साथ हंसमुख था। परिवार के किसी भी काम में आगे रहता था। उस रोज मैंने देखा कि भाभी बीयर पीकर डांस कर रही हैं। मैंने पूछा कि नाना कहां है। उसने कह दिया कि आ रहा है। मुझे अजीब लगा। मैं भाई के घर पहुंच गई।

वो कंबल ओढ़े जमीन पर गद्दे पर लेटा था। वो इतनी देर तक सोता ही नहीं था। मैंने दो-तीन बार नाना-नाना कह जगाने की कोशिश की, लेकिन असर नहीं हुआ। इसके बाद उसे हिलाया, तो भी हलचल नहीं हुई। कंबल हटाकर उसके शरीर पर हाथ रखा, तो एक-दम ठंडा, पैर हिलाए तो वो अकड़े हुए थे।

मेरे तो पैर के नीचे से जमीन खिसक गई। उल्टे पैर दौड़ती हुई चाचा के घर पहुंच गई। वहां डीजे बज रहा था, तो जोर-जोर से चिल्लाकर सबको पूरी बात बताई। सब लोग दौड़ते हुए घर पहुंचे।

भतीजा बोला- काकी अकेले नहीं मार सकती आखिर में कैलाश के भतीजे विक्रम ने कहा- जब मैं काका के घर पहुंचा तो देखा कि काकी समेत पूरा परिवार जमा है। काकी सबसे तेज रो रही हैं। मैंने काका की लाश देखी, गर्दन पर रगड़ के निशान थे, गाल पर भी खरोंच थी। मैंने काकी से पूछा क्यों मार डाला इन्हें। काकी अकेले नहीं मार सकती, उनके साथ जरूर दूसरा शख्स है। हम लोग यही चाहते हैं कि जो भी इस मामले में शामिल है, उसे पकड़ा जाए।

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