आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा और उसके सहयोगी शरद जायसवाल और चेतन सिंह गौड़ को ईडी ने सोमवार को कोर्ट में पेश किया। दोपहर 1:22 बजे तीनों को पेश किया गया। 1.57 बजे तीनों को जेल के लिए रवाना कर दिया गया। ईडी की स्पेशल कोर्ट में शरद के वकील सूर्यकांत बुझाड़े ने न्यायिक हिरासत में मुवक्किल को मेडिकल सुविधा देने की मांग की। उन्होंने बताया कि, शरद हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी से ग्रस्त है।
इस पर कोर्ट ने जवाब दिया कि, जरूरत अनुसार जेल प्रशासन उन्हें मेडिकल सुविधा देगा। इसके बाद तीनों को ईडी की कस्टडी में जेल के लिए रवाना किया गया। ईडी की कस्टडी से लौटने के बाद तीनों को ब खंड स्थित तीन अलग-अलग खास बैरक में रखा गया। यहीं उन्हें पहले रखा गया था, इस बैरक के आस पास गमलों के निर्माण का काम किया जाता है।
इस बैरक में आम कैदियों को जाने की इजाजत नहीं है। तीनों को खास निगरानी में रखा गया है। तीनों के बैरक में केवल वही कैदी हैं, जो जेल प्रशासन के लिए खुफिया सूचना देने का काम करते हैं। यह कैदी तीनों की हर गतिविधि की निगरानी कर रहे हैं। रात का खाना तीनों ने अपने-अपने बैरक में खाया।
सूत्रों का दावा कि, सौरभ ने केवल दो रोटी दाल से खाई। जबकि खाने में चार रोटी, दाल स्टीम राइस और कद्दू की सब्जी तीनों को दी गई थी। खाने के बाद तीनों अकेले ही बैठे रहे। किसी अन्य कैदी से कोई बातचीत नहीं की। सौरभ ईडी की कस्टडी से लौटने के बाद अधिक गुमसुम है।

निगरानी में निकाला जाता है बैरक से बाहर
तीनों को जेल में इस तरह से रखा गया है कि, आपस में बातचीत न कर सकें। महज 45 मिनट के लिए दोपहर के समय से तीनों को बैरक से बाहर निकलने की इजाजत होती है। इस दौरान उनकी निगरानी के लिए दो प्रहरी और जेल के विश्वसनीय कैदी रहते हैं।
तीनों के बैरक में आक्रामक किस्म का कोई कैदी नहीं रखा गया है। जेल के अंदर भी उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। हालांकि जेल में तीनों ही अन्य कैदियों से बात करने से बचते हैं। अधिकांश समय बैरक में लेटे और बैठे हुए बिता रहे हैं।
जेल में यह मिली थी तीनों को पहचान
सौरभ को जेल में विचाराधीन बंदी नंबर 5882, शरद को 5881 और चेतन को 5880 रूप में पहचाना जाता है। सूत्रों की मानें तो तीनों की सुरक्षा को देखते हुए इन बैरक में मौजूद कुख्यात बंदियों को शिफ्ट किया गया था।




