विदिशा। जिले में साइबर अपराध का अब तक का सबसे सनसनीखेज मामला सामने आया है। शातिर जालसाजों ने एक फर्जी कंपनी के जरिए महज सात महीने के भीतर 23 करोड़ 20 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी को अंजाम दिया। ठगों ने एसबीआई (SBI) में एक ‘म्यूल अकाउंट’ खुलवाकर देश भर में करीब 1.5 लाख ट्रांजेक्शन किए। पुलिस ने इस गिरोह के दो सदस्यों को दबोच लिया है, जबकि मुख्य सरगना अभी फरार है।
ऐसे खुला राज: पटना से विदिशा तक जुड़े तार
इस महाठगी का खुलासा तब हुआ जब बिहार की पटना स्थित एसबीआई ब्रांच ने एक संदिग्ध लेनदेन की शिकायत की। इसके बाद देखते ही देखते 24 राज्यों से शिकायतों की झड़ी लग गई। विदिशा की सांची रोड स्थित एसबीआई वाणिज्य शाखा ने जब तक खाता फ्रीज किया, तब तक आरोपी 23.27 करोड़ रुपये निकाल चुके थे। कार्रवाई के वक्त खाते में महज 6 लाख रुपये ही बचे थे।
फर्जी फर्म और करोड़ों का खेल
पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपियों ने सितंबर 2025 में एक पार्टनरशिप फर्म के नाम पर बैंक खाता खुलवाया था।
- लेनदेन का दायरा: 10 हजार से लेकर 50 लाख रुपये तक की रकम इस खाते में घुमाई गई।
- नेटवर्क: ठगी का शिकार हुए लोग देशभर के अलग-अलग राज्यों से हैं।
- मोडस ऑपरेंडी: फर्जी कंपनी दिखाकर बैंक को गुमराह किया गया और म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया गया।
मास्टरमाइंड की तलाश, खंगाली जा रही ‘मनी ट्रेल’
बैंक प्रबंधक धर्मवीर सिंह की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज किया है। सीएसपी अतुल सिंह ने बताया कि पकड़े गए दो आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब ‘मनी ट्रेल’ (पैसों के आने-जाने का रास्ता) खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि ठगी की यह विशाल राशि किन-किन खातों में भेजी गई है। पुलिस को शक है कि इसके पीछे कोई बड़ा अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय है।
वरिष्ठ पत्रकार की कलम से: यह मामला बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। इतनी बड़ी राशि का ट्रांजेक्शन होता रहा और सिस्टम को भनक तक नहीं लगी। जनता को भी अनजान खातों में पैसा जमा करने से पहले सावधान रहने की सख्त जरूरत है।



