संजय कुमार शर्मा, उमरिया। world women’s day 2022: 80 साल की उम्र में जोधइया बाई बैगा को बैगा चित्रकारी ने राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा दिया। उन्हें आठ मार्च को महिला दिवस पर दिल्ली में राष्ट्रीय मातृशक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इस क्षण का सपना देखते- देखते उनके गुरु स्वर्गीय आशीष स्वामी अप्रैल 2021 में दुनिया से विदा हो गए। आखिरकार इस बूढ़ी आदिवासी महिला ने उसे पूरा कर दिखाया। उमरिया के छोटे से गांव लोढ़ा में रहनेवाली जोधइया बाई बैगा ने आसमान से भी ऊंची उड़ान भर ली है। 80 की उम्र में जब लोगों की उम्मीदें टूट जाती हैं तब जोधइया बाई की उड़ान नई ऊंचाइयां छू रही है।
विलुप्त होती बैगिन चित्रकला को किया जीवितः जोधइया बाई ने विलुप्त होती बैगिन चित्रकला को एक बार फिर जीवित कर दिया है। जिस बड़ादेव और बघासुर के चित्र कभी बैगाओं के घरों की दीवार पर सजते थे वे अब दिखाई नहीं देते और न ही उन्हें नई पीढ़ी के बैगा जानते हैं। उन्हीं चित्रों को जब जोधइया ने कैनवास और ड्राइंग शीट पर आधुनिक रंगों से उकेरना शुरू किया तो बैगा जनजाति की यह कला एक बार फिर जीवित हो उठी। जोधइया बाई द्वारा विगत 10 दस वर्षों में तैयार किए गए चित्रों के विषय पुरानी भारतीय पंरपरा में देवलोक की परिकल्पना, भगवान शिव तथा बाघ पर आधारित हैं। इनमें पर्यावरण एवं वन्य जीव के महत्व को प्रदर्शित किया जाता है।
मिलान व पेरिस में लग चुकी है उनके चित्रों की प्रदर्शनीः इनकी पेटिंग्स मिलान इटली, फांस के पेरिस में आयोजित आर्ट गैलरी में प्रदर्शित की जा चुकी हैं। इसके अलावा इंग्लैंड, अमेरिका एवं जापान आदि देशों में भी इनकी बनाई बैगा जनजाति की परंपरागत पेटिंग्स की प्रदर्शनी लग चुकी है।
दुख भरा जीवनः जोधइया बाई के जीवन की कथा भी दुखों से भरी है। वे बताती हैं कि केवल 30 साल की उम्र में पति का साया सिर से उठ गया और बच्चों को पालने के लिए मजदूरी ही एक रास्ता बचा। इस दौरान जोधइया ने माटी-गारे का काम किया। जंगल में हिंसक जानवरों के बीच चारा काटा।
ये हैं प्रमुख उपलब्धियां
– शांति निकेतन विश्वभारती विश्वविद्यालय, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, आदिरंग कार्यक्रम में शामिल हुईं और सम्मानित हुईं।
– मप्रजनजातीय संग्रहालय भोपाल में जोधइया बाई के नाम से एक स्थायी दीवार बनी हुई है जिस पर इनके बनाए हुए चित्र हैं।
– प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान न सिर्फ जोधइया बाई को सम्मानित कर चुके हैं बल्कि वे उनसे मिलने के लिए लोढ़ा के उनके कर्मस्थल तक भी पहुंच गए थे।
– बैगा आदिवासी चित्रकार जोधइया बाई का नाम जिला प्रशासन द्वारा पद्श्री अवार्ड के लिए नामांकित किया जा चुका है।




