नगर निगम के इतिहास में संभवत: करीब 40 वर्ष बाद दूसरी बार सबसे लंबा प्रशासक राज कायम है। पहले कोरोना फिर राजनीतिक खींचतान के चलते टलते आ रहे नगर निगम के चुनाव के कारण शहर की बागडोर प्रशासक के हाथों में हैं। 20 फरवरी 2022 को प्रशासक राज के तकरीबन दो वर्ष पूरे हो जाएंगे। निवर्तमान महापौर स्वाति गोडबोले ने 20 फरवरी 2020 को कार्यकाल पूरा किया था। तब से प्रशासक का दायित्व संभागायुक्त बी चंद्रशेखर संभाल रहे हैं। नगर निगम में प्रशासक व्यवस्था पर नजर डाले तो करीब 40 वर्ष पूर्व वर्ष 1982 में जब नगर निगम के तत्कालीन महापौर नारायण प्रसाद दुबे थे तब उनकी सरकार भंग होने के बाद प्रशासक बैठाया गया था। तब तकरीबन 13 साल तक प्रशासक राज कायम रहा। 1995 में जब कल्याणी पांडेय तत्कालीन महापौर चुनी गईं और नई नगर सरकार अस्तित्व में आई तब कहीं जाकर प्रशासक राज समाप्त हुआ था।
अब नगरीय चुनाव की अटकलें भी दफन : जानकारों की माने तो नगर निगम की कमान प्रशासक के हाथों में दिए पूरे दो वर्ष पूरे हो जाएंगे। नगर निगम में वापस अब नगर सरकार कब आकार लेगी इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। क्योंकि पहले कोरोना फिर राजनीतिक खींचतान से नगरीय चुनाव टलते आ रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव का जब बिगुल फूंका था तब ये कयास लगाए जा रहे थे कि पंचायत चुनाव के बाद इसके बाद नगर निगम चुनाव हो जाएंगे। लेकिन आरक्षण को लेकर जो सियासत गरमाई उससे पंचायत चुनाव तो टले ही नगरीय निकाय चुनाव की अटकलें भी दफन हो गई।
फिर बनेगा इतिहास : नगरीय चुनाव कब होंगे इस पर फिलहाल संशय बना हुआ है। राजनीतिक उठापटक भी नजर नहीं आ रही है। भाजपा, कांग्रेस जैसी पार्टियां बूथों काे मजबूत करने में जुटी है। सरकार भी इस तरफ अभी ध्यान नहीं दे रही है। जिस तरह से निकाय चुनाव टलते आ रहे हैं उसे देखकर ये भी कहा जाने लगा है कि यदि प्रशासक राज और खींचा तो ये भी नगर निगम के इतिहास में दर्ज हो जाएगा।
संभागायुक्त संभाल रहे दोहरी जिम्मेदारी : फिलहाल संभागायुक्त बी चंद्रशेखर नगर निगम का प्रशासक का दायित्व संभाल रहे हैं। संभागायुक्त व नगर निगम प्रशासक की दोहरी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। यह अलग बात है कि नगर निगम में वह ज्यादा समय नहीं दे पा रहे हैं। जो भी निर्णय या फाइल है वे संभागायुक्त कार्यालय से ही निपटा रहे हैं।
दो वर्षों में शहर में नहीं हुए नए काम, पुराने भी अब तक अधूरे : नगर सत्ता का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 20 फरवरी 200 को प्रशासक राज कायम है। लेकिन इन दो वर्षों में इस दौरान शहर को कोई बड़ी सौगात नहीं मिली है। नए काम जहां स्वीकृत नहीं हो पा रहे हैं वहीं पूरे निर्माण व विकास कार्य भी अब तक अधूरे है। यहां तक की बारिश में खराब हुई सड़कें भी अब तक नहीं बन पाई है।
स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत रांझी-घमापुर सहित फेज दो और तीन के तहत स्मार्ट रोड, ओमती नाले के ऊपर नान मोटराइज्ड ट्रैक, घंटाघर के पास कंनवेंशन सेंटर, राइट टाउन स्टेडियम में मल्टी स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स, टाउन हाल में डिजिटल लाइब्रेरी, इंदिरा मार्केट के पास सेठ गोकुलदास की धर्मशाला जैसे पूर्व के कार्य भी पूरे नहीं हो पाए हैं।
नगर निगम में प्रशासक राज पर नजर :
– 1982 को नगर सरकार हुई थी भंग, उस समय नारायण प्रसाद दुबे थे महापौर।
– 13 साल तक कायम रहा प्रशासक राज, उस समय एक वर्ष के लिए होते थे चुनाव।
– 1995 तक प्रशासक के हाथों में रही नगर निगम की कमान, फिर कल्याणी पांडेय ने संभाली सत्ता।
– 20 फरवरी 2020 को निवर्तमान महापौर स्वाति गोडबोले का कार्यकाल पूरा हुआ। तब से प्रशासक राज है कायम
– 20 फरवरी 2022 को हो दूसरी बार प्रशासक राज पूरे हो जाएंगे दो वर्ष।
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नगर निगम में ये दूसरी मर्तबा सबसे लंबा प्रशासक राज कहा जा सकता है। इसके पूर्व 1982 से 1995 तक करीब 13 वर्ष नगर निगम की बागडोर प्रशासक के हाथों में थी।
-केसी पांडेय, निज सचिव, प्रशासक कार्यालय नगर निगम




