शहर के चौराहों में लगे उच्च स्तरीय आधुनिक सिग्नल कब बंद हो जाए और यातायात व्यवस्था पटरी से उतर जाए कहा नहीं जा सकता। क्योंकि करीब आधा दर्जन सिग्नल ऐसे हैं जो कभी भी बंद और कभी भी चालू हो जाते हैं। सिग्नल बंद होने से कई बार चौराहों की यातायात व्यवस्था इस कदर चरमरा जाती है कि लोग आपस में उलझ भी जाते हैं। शहर के व्यस्तम चौराहों में शुमार रद्दी चौकी, नौदराब्रिज, तैयब अली चौक पर लगे सिग्नल कभी बंद तो कभी चालू होने के कारण अराजक यातायात के नजारे कभी भी देखे जा सकते हैं। विदित हो कि शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करीब 16 करोड़ रुपये खर्च कर 12 चौराहों पर आइटीएमएस (इंट्रीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) स्थापित किए गए हैं। जिसे करीब 23 करोड़ रुपये की लागत से बने कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से जोड़ा गया है। आधुनिक सिस्टम की मदद से ही यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों को ई-चालान भी भेजा जाता है। जबकि अन्य गतिविधियों पर भी नजर रखी जाती है। सिस्टम का संचालन और मेटनेंस टेक्नोसेस कंपनी द्वारा किया जा रहा है।
फ्लाई ओवर निर्माण के चलते ठप पड़े दो चौराहों के सिग्नल : मदन महल से दमोहनाका तक बनाए जा रहे फ्लाई ओवर निर्माण के चलते बाधा बन रहे बल्देवबाग और रानीताल चौराहे पर स्थापित सिस्टम को बंद कर दिए गए हैं। सिस्टम ठप पड़े हैं। अब इन्हें पेंटीनाका व अन्य चौराहों में शिफ्ट करने की बात कही जा रही है। फिलहाल सिग्नल बंद होने के कारण इन दोनों चौराहे पर रोजाना जाम के हालात बन रहे हैं। यहां सुबह से शाम तक यातायात का जबर्दस्त दबाव बना रहता है। वाहन चालक पहले सिग्नल की लालबत्ती देखकर रूक जाते थे और हरी देखते ही निकल जाते थे। अब न लाल बत्ती जल रही न हरी।
इन चौराहें के सिग्नल भी दे रहे धोखा :
रद्दी चौकी-
इसी तरह रद्दी चौकी में लगाया गया आइटीएमएस युक्त सिग्नल भी धोखा दे रहा है। सिग्नल की कभी लाल बत्ती जल उठती तो कभी पीली बत्ती घंटों जलती रहती है। जिससे वाहन चालक कई बार भ्रमित हो जाते हैं कि रुकना है कि चलना है। कई लोग तो सिग्नल को दरकिनार कर एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में दुर्घटना का शिकार भी हो चुके हैं।
नौदरा ब्रिज-
नौदरा ब्रिज चौराहे पर लगा सिग्नल भी जब चाहे बंद हो जाता है। सीवर लाइन निर्माण कार्य के चलते सिग्नल को इस तरह आपरेट किया जा रहा है कि कब बंद हो जाए और कब चालू कहा नहीं जा सकता। इस चौराहे से भी सुबह से रात तक हजारों वाहन गुजरते हैं। स्मार्ट सिटी का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस अपने हिसाब से सिग्नल आपरेट कर रही है। लेकिन इससे वाहन चालकों की मुसीबत जरूरत बढ़ रही है।
तैयब अली चौक-
तैयब अली चौक पर लगाया गया सिस्टम चालू कम बंद ज्यादा रहता है। स्मार्ट सिटी कंपनी ने बिना कार्ययोजना के यहां सिग्नल स्थापित कर दिया है। सिग्नल लगाने से पहले न तो सड़क की चौड़ाई बढ़ाई गई न ही लेफ्ट टर्न ही खोले गए। लगने के कुछ दिन बाद से सिग्नल बंद ही पड़ा है। क्योंकि सिग्नल चालू होने से जाम के हालात बन रहे थे।
आइटीएमस से ये फायदें मिले :
– आइटीएमएस से लैस सिग्नल में उच्च स्तरीय सीसीटीवी कैमरे लगे हैं
– इन्हें स्मार्ट सिटी के कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से जोड़ा गया है चौराहे की हर गतिविधि की सेंटर से निगरानी की जाती है।
– सिग्नल में लगे लाउड स्पीकर से यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर चेतावनी भी दी जाती है
– सिग्नल जंप करने, ट्रिपल सवारी बैठाने, वाहनों पर गलत नम्बर प्लेट लगाने पर कमांड सेंटर से ही सीधे ई-चालान भेजे जाएंगे।
– गलत तरीक से ड्राइविंग करने वाले व ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले भी ट्रेस हो सकेंगे।
– चौराहों में ट्रैफिक का दबाव कम होगा और दुर्घटनाओं में कमी आई है
2019 में किए थे स्थापित, जुर्माना से 3 करोड़ भी कमाए : आइटीएमएस सिस्टम को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत वर्ष 2019 में स्थापित किया गया था। सिग्नल में यातायात का उल्लंघन करने पर करीब तीन लाख वाहन चालकों को ई-चालान भेजे गए। जिनसे करीब तीन करोड़ रुपये का जुर्माना भी वसूला गया।
इन चौराहों पर लगाए गए आइटीएमएस :
– ब्लूम चौक
– दमोहनाका
– कंटगा चौराहा
-बंदरिया तिराहा
– रद्दीचौकी
– गोहलपुर
– नौदराब्रिज
– तेयब अली चौक
– लेबर चौक
– रानीताल चौक
– बलदेव चौराहा
– तीनपत्ती चौक
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यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने शहर के 12 चौराहों में आइटीएमएस स्थापित किए गए हैं। कुछ चौराहों में जरूर निर्माण कार्यों के चलते सिग्नल कुछ दिनों के लिए बंद किए गए थे। ट्रैफिक पुलिस अपने हिसाब से सिग्नल आपरेट कर रही है। रानीताल और बलदेवबाग चौराहे में लगे सिग्नल फ्लाई ओवर निर्माण के कारण बंद कर दिए गए हैं।
-अंकुर खरे, डेटा मैनेजमेंट आफीसर, स्मार्ट सिटी




