उसी विभाग में करोड़ो के घोटाले की जनहित याचिका जिसमे हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा मप्र की Startup Policy का लोकार्पण किया गया था।
जबलपुर: आज दिनांक 23.05.2022 को मप्र उच्च न्यायालय जबलपुर की डबल बेंच पर जस्टिस वीरेंद्र सिंह व जस्टिस प्रकाश चंद्र गुप्ता ने Whistleblower वरिष्ठ पत्रकार अनम इब्राहिम के द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर फैसला सुनाया। यह जनहितैषी याचिका EOW, लोकायुक्त, मप्र सरकार, मुख्य सचिव, MSME विभाग, पंचायत राज, सेडमैपएवं आईएएस विवेक कुमार पोरवाल और अपात्र सेडमैप कार्यवाहक संचालक अनुराधा सिंघाई के विरुद्ध दायर की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मनीष दत्त ने बहस की व अधिवक्ता श्री मनीष कुमार तिवारी द्वारा इस याचिका को माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष पेश किया गया। जनहित में दायर इस याचिका में आरोप था कि सेडमैप के माध्यम से लघु उद्योग व पंचायत राज के नाम पर करोड़ो का भ्रष्टाचार करने की मंशा से CEDMAP के कार्यवाहक संचालक के पद पर अपात्र व्यक्ति की नियुक्ति की गई थी, साथ ही रोज़गार के नाम पर केंद्र व राज्य की सैकड़ो योजनाओं का दुरुपयोग कर प्रदेश के तकरीबन 2 लाख बेरोजगार युवाओं को नौकरी के नाम पर ठगा गया है जिसकी शिकायत Whistleblower पत्रकार अनम इब्राहिम द्वारा मय साक्ष्यों के सम्बंधित अधिकारियों के समक्ष व आर्थिक अपराध शाखा मप्र एवं लोकायुक्त में भी की गई थी परंतु उच्च स्तरीय अफसरों के दमखम के चलते करोड़ो के चल रहे भ्रष्टाचार और विधि विरुध की गई पड़ नियुक्ति से पर्दा नही उठ पाया जिस कारण वश जनहित याचिका माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष दायर की गई थीं जिसकी सुनवाई high court की युगल पीठ पर आज हुई।
EOW व लोकायुक्त की तरफ से अधिवक्ता श्री अभिजीत अवस्थी व श्री मधुर शुक्ला ने counter करते हुए याचिका को खारिज करने की न्यायालय से अपील की परन्तु पर्याप्त साक्ष्य का अवलोकन करने के उपरांत दोनों न्यायधीशों द्वारा याचिका को खारिज न करते हुए करोड़ो के घोटाले की जांच के आदेश सरकार को समय सीमा के अंतर्गत करने के जारी किए गए।




