Friday, February 13, 2026
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व्‍हीकल फैक्‍ट्री जबलपुर: तोप की ताकत संग वाहनों का भरोसा

अतुल शुक्ला, जबलपुर। अंतरराष्‍ट्रीय सीमा से लगे रेतीले और दुर्गम इलाके हों या फिर जम्मू-कश्मीर, लद्दाख से लेकर सिक्किम तक के पहाड़ी रास्ते, हर जगह जबलपुर की व्हीकल फैक्‍ट्री में बने सैन्य वाहनों को कोई जोड़ नहीं है। जम्मू से कन्याकुमारी तक सुरक्षा जवानों को पहुंचाना हो या फिर दुर्गम रास्तों को तय कर इनके लिए राशन-पानी ले जाना हो, ये वाहन सेना के भरोसे पर हमेशा खरे उतरे तो यहां बनी तोप ने सेना की ताकत बढ़ाई। केवल सेना ही नहीं, अर्धसैनिक बलों की हिम्‍मत को भी दोगुना किया है। दिन हो या रात, या हो ठंड, बारिश अथवा गर्मी, हर मौसम में सेना को एक जगह से दूसरे जगह ले जाने में डटे हुए हैं यहां बने वाहन।बात 1972 में सैन्य वाहनों की ताकत रहा शक्तिमान व्हीकल हो या फिर आज बन रहे भूमिगत सुरंग सुरक्षा वाहन ऐरावत, व्हीकल फैक्‍ट्री जबलपुर ने देश को समय के साथ देश को ऐसे वाहन दिए, जो ताकत, सुरक्षा और भरोसे के हर मापदंड पर खरे उतरे। इस भरोसे के दम पर आज व्हीकल फैक्‍ट्री जबलपुर न सिर्फ भारतीय सेना के लिए आधुनिक सैन्य वाहन तैयार कर रही है बल्कि राज्य पुलिस की सुरक्षा का भी कवच बनी है।

शक्तिमान वाहन से की शुरुआत: सन् 1959 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने जबलपुर में व्हीकल फैक्‍ट्री की आधारशिला रखी। सन् 1969 में व्हीकल फैक्‍ट्री भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड की ईकाई बनकर तैयार हुई। 1972 में यहां पर सैन्य वाहनों का निर्माण शुरू हो गया। प्रारंभ में शक्तिमान वाहन यहां तैयार किए जाते थे जो सेना के वाहनों में सबसे ताकतवर वाहन रहा। इसके बाद निशान, जोंगा जैसे शक्तिशाली सैन्य वाहन यहां बने।

अब सेना के लिए बना रहे सारंग तोप: व्हीकल फैक्‍ट्री जबलपुर (वीएफजे) के कार्यप्रबंधक सौरभ अग्रवाल बताते हैं कि व्हीकल फैक्‍ट्री के वाहनों पर सेना का यह भरोसा ही था कि यहां के कर्मचारियों-अधिकारियों काे सैन्य वाहन के साथ सीमा पर तैनात सैनिकों की ताकत कही जाने वाली गन सारंग बनाने का भी काम मिला। साल 2019-20 से देश की सबसे शक्तिशाली गन सारंग M-46 का काम शुरू हुआ। इनकी खासियत है मारक क्षमता, जो 36 किलोमीटर है। यह एक घंटे में 42 राउंड फायर करती है। सेना ने व्हीकल फैक्‍ट्री जबलपुर को करीब 300 सारंग तोप का ऑर्डर दिया है, जिसमें अभी तक लगभग 40 सारंग तोप बनाकर सेना को दी जा चुकी हैं।

व्हीकल फैक्‍ट्री के सबसे शक्तिशाली वाहन:

1. मॉडिफाई माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल (एमएमपीवी)- ये दो तरह के सैन्य वाहन हैं। एक चार चके वाला और दूसरा छह चके वाला। यह आधुनिक सैन्य वाहन परिष्‍कृत भूमिगत सुरंग से सुरक्षा करता है। इसे 2008-09 से लगातर इसे उन्‍नत बनाया जा रहा है। इसमें लाइट-मीडियम मशीनगन लगी है। इसमें 12 सैन्य जवानों को ले जाने की क्षमता है। इस पर 35 किलोग्राम तक की बारूदी सुरंग का भी कोई असर नहीं होता।

2. लैडेन पैसेंजर ट्रांसपोर्ट ऑक्‍जीलियरी (एलपीटीए)- इसे बी क्लास वाहन कहते हैं। इनका उपयोग सेना, हथियार और सामान ले जाने के लिए होता है। इसमें 11 से 15 जवान आसानी से बैठ सकते हैं। इसमें लगे शक्तिशाली इंजन के दम से ऊबड़-खाबड़, पथरीले और रेतीले क्षेत्रों में सेना के जवानों को आसानी से लाया और ले जाया जाता है।3. वाटर बाउजर व्हीकल- ये दो और पांच हजार लीटर के वाटर टैंक है। पीने के पानी को पहाड़ी इलाकों, सुरंग क्षेत्रों में सेना तक पहुंचाने के लिए इनका उपयोग किया जाता है। यह एक थर्मस की तरह काम करता है, जिसमें पानी कई दिन तक जस का तस बना रहता है।

3. वाटर बाउजर व्हीकल- ये दो और पांच हजार लीटर के वाटर टैंक है। पीने के पानी को पहाड़ी इलाकों, सुरंग क्षेत्रों में सेना तक पहुंचाने के लिए इनका उपयोग किया जाता है। यह एक थर्मस की तरह काम करता है, जिसमें पानी कई दिन तक जस का तस बना रहता है।

4. स्टेलियन व्हीकल- यह भी सेना के जवानों को लाने-ले जाने के लिए उपयोग किया जाता है। इसमें एलपीटीए की तुलना में अधिक जवानों का बैठाकर आसानी से दुर्गम रास्ते तय कर किसी भी क्षेत्र में पहुंचाया जाता है।5. किचन कंटेनर- यह एक आधुनिक चलता-फिरता किचन वाहन है। इनमें सैकड़ों जवानों का एक साथ भोजन बनाया जा सकता है। इनमें लगे कंटेनर, हीटर, फ्रीज समेत कई आधुनिक उपकरणों की मदद से खाना बनाया और इसमें ही सुरक्षित रखा जाता है।

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